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सेहत के लिए थोड़ा धूप में भी निकला करो...
Wed, 12 Jun 2019 01:28 AM IST
sahaj sahaj
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: sahaj sahaj
Updated Wed, 12 Jun 2019 01:28 AM IST
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धूप
- फोटो : अमर उजाला
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युवावस्था में धूप से दूरी महिलाओं के लिए प्रौढ़ावस्था में बीमारी का कारण बन रही है। ऐसे लोगों को प्री मेनोपॉज के वक्त हड्डियों से जुड़ी तमाम बीमारियां घेर लेती हैं। इतना ही नहीं, कुछ में गर्भधारण संबंध व अन्य समस्याएं भी हो रही हैं। इसके पीछे बड़ी वजह विटामिन डी की कमी की वजह से कैल्शियम की कमी के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का प्रभावित होना है।
इस संबंध में केजीएमयू के फिजियोलॉजी विभाग की ओर से महिलाओं पर एक शोध किया गया है। करीब तीन सौ महिलाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई कि जो महिलाएं युवावस्था में धूप से दूर रहीं, उनमें पोस्ट मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है। इससे जननांग संबंधी बीमारियां होती हैं। पेट का मोटापा बढ़ता है और हड्डियों के चटकने का डर ज्यादा रहता है। करीब 40 से 50 फीसदी में दिल संबंधित बीमारियां भी पाई गई हैं। इन महिलाओं को 40 की उम्र पार करने के बाद लाइफ स्टाइल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। मोटापा न बढ़ने पाए, इसके लिए शारीरिक श्रम जरूर करें। ज्यादा वसायुक्त चीजों का सेवन न करें। एक तरफ मोटापा रोकना है तो दूसरी तरफ कैल्शियम को मुकम्मल रखना है।
विंडो पीरियड में रहें सावधान
फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर वाणी गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में 40 से 50 वर्ष की उम्र को विंडो पीरियड के रूप में लिया जाता है। इसमें खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है। खासतौर से कैल्शियम वाली चीजें ज्यादा लेना चाहिए। शाम को एक गिलास दूध जरूरी है। पत्तेदार सब्जियां और मोटे अनाज की रोटियां खानी चाहिए।
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शोध में यह बात आई सामने
शोध के दौरान यह बात सामने आई कि जो महिलाएं धूप में अक्सर निकलने वाली थीं, उनमें शहरी महिलाओं की अपेक्षा प्री मेनोपॉज के दौरान हड्डी की बीमारियां करीब 50 से 60 फीसदी कम पाई गईं। उनका बीपी दुरुस्त था। हृदय संबंधी बीमारी नहीं थी। मोटापा नहीं था। बीएमआई सही पाया गया। इतना जरूर था कि कुछ में पोषण की कमी पाई गई थी। इसकी बड़ी वजह थी कि खानपान का दुरुस्त नहीं होना। धूप में निकलने वाली कुछ महिलाओं में 51 फीसदी महिलाओं में प्री मोनोपॉज की स्थिति 45 साल के बाद पाई गई। जबकि धूप में न निकलने वालों में 40 साल के बाद ही प्री मोनोपॉज की स्थिति पाई गई।
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इस संबंध में केजीएमयू के फिजियोलॉजी विभाग की ओर से महिलाओं पर एक शोध किया गया है। करीब तीन सौ महिलाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई कि जो महिलाएं युवावस्था में धूप से दूर रहीं, उनमें पोस्ट मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है। इससे जननांग संबंधी बीमारियां होती हैं। पेट का मोटापा बढ़ता है और हड्डियों के चटकने का डर ज्यादा रहता है। करीब 40 से 50 फीसदी में दिल संबंधित बीमारियां भी पाई गई हैं। इन महिलाओं को 40 की उम्र पार करने के बाद लाइफ स्टाइल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। मोटापा न बढ़ने पाए, इसके लिए शारीरिक श्रम जरूर करें। ज्यादा वसायुक्त चीजों का सेवन न करें। एक तरफ मोटापा रोकना है तो दूसरी तरफ कैल्शियम को मुकम्मल रखना है।
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विंडो पीरियड में रहें सावधान
फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर वाणी गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में 40 से 50 वर्ष की उम्र को विंडो पीरियड के रूप में लिया जाता है। इसमें खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है। खासतौर से कैल्शियम वाली चीजें ज्यादा लेना चाहिए। शाम को एक गिलास दूध जरूरी है। पत्तेदार सब्जियां और मोटे अनाज की रोटियां खानी चाहिए।
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शोध में यह बात आई सामने
शोध के दौरान यह बात सामने आई कि जो महिलाएं धूप में अक्सर निकलने वाली थीं, उनमें शहरी महिलाओं की अपेक्षा प्री मेनोपॉज के दौरान हड्डी की बीमारियां करीब 50 से 60 फीसदी कम पाई गईं। उनका बीपी दुरुस्त था। हृदय संबंधी बीमारी नहीं थी। मोटापा नहीं था। बीएमआई सही पाया गया। इतना जरूर था कि कुछ में पोषण की कमी पाई गई थी। इसकी बड़ी वजह थी कि खानपान का दुरुस्त नहीं होना। धूप में निकलने वाली कुछ महिलाओं में 51 फीसदी महिलाओं में प्री मोनोपॉज की स्थिति 45 साल के बाद पाई गई। जबकि धूप में न निकलने वालों में 40 साल के बाद ही प्री मोनोपॉज की स्थिति पाई गई।