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सुल्तानपुर : दो गांवों में 20 दिन में 38 की मौत, सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार से थे पीड़ित
Fri, 21 May 2021 09:56 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुल्तानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुल्तानपुर
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 21 May 2021 09:56 PM IST
सार
एक सप्ताह पहले तक तकरीबन 38 मौतों से यह दोनों गांव स्वास्थ्य महकमे के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। उधर, इन गांवों के लोग जांच व वैक्सिनेशन में कोई सहयोग भी नहीं कर रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
लंभुआ तहसील क्षेत्र के दो गांवों में 20 दिन में 38 लोगों की मौत हो गई। सभी सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित थे। ग्रामीणों ने शवों को दफना दिया। एक के बाद एक हुई मौतों से ग्रामीणों में हड़कंप है। हालांकि सूचना मिलने के बाद गांव पहुंचे स्वास्थ्य कर्मियों के आग्रह के बावजूद ग्रामीण न तो जांच को तैयार हैं, न ही वैक्सीनेशन करा रहे हैं।
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प्रतापगढ़ जिले की सीमा पर अल्पसंख्यक बहुल गांव तातोमुरैनी और मलाकदोष पट्टी स्थित है। तातोमुरैनी की आबादी करीब 15 हजार और मलाकदोष पट्टी की पांच हजार है। दोनों गांवों में अधिकतर परिवार के लोग खाड़ी देश या महानगरों में रोजगार से जुड़े हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग पंचायत चुनाव के दौरान वोट डालने गांव आए थे। बिना एहतियात के बाहर से आए लोगों ने कोरोना गाइडलाइन का पालन भी नहीं किया।
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सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार आने पर भी गंभीरता नहीं समझी और गांव में ही क्लीनिक चलाने वालों के यहां इलाज कराया। इस बीच, मौतों का सिलसिला शुरू हो गया और शवों को दफनाया जाता रहा। ग्रामीणों के अनुसार 18 अप्रैल से मई के दूसरे सप्ताह की शुरुआत तक दोनों गांवों के पुरवों को मिलाकर करीब 38 लोगों की मौत हुई है। मृतकों में उस्मान खां, हयात खां, अली अहमद, डॉ. मंजूर, जरीना बेगम, शाकिर खान, हफीज मास्टर, मूसा पठान, अब्बास खां, मिट्ठू लाल, नियामत खां, रशीद खान, नगीना, रेशमा, बाबूलाल, जफरून निशा, लाल मोहम्मद, अखलाक, बदरुद्दीन समेत 38 लोग शामिल हैं। हलका लेखपाल विजय नारायण तिवारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मरने वालों में अधिकतर 60 से 70 वर्ष के बीच थे।
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जांच में सहयोग नहीं, मारपीट की कोशिश : सीएचसी अधीक्षक
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश गुप्ता ने बताया कि सूचना मिलते ही 30 अप्रैल को गांव में स्वास्थ्य टीम गई थी। वहां पर गांव वालों ने कोई सहयोग नहीं किया। लोगों ने स्वास्थ्य टीम के साथ मारपीट करने की कोशिश की। बार बार कहने के बावजूद ग्रामीण जांच और वैक्सीनेशन कराने को तैयार नहीं हुए।