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मायाराज में सरकार-अफसर-कॉर्पोरेट के सिंडीकेट से हुआ था चीनी मिल घोटाला

Sun, 09 Apr 2017 03:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 09 Apr 2017 03:34 PM IST
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sugar mill scam in Uttar Pradesh.
बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मायावती सरकार के समय में चीनी मिलों की बिक्री के घोटाले की नए सिरे से जांच का आदेश कर सरकार-अफसरशाही और कॉर्पोरेट की मिलीभगत के गंदे खेल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने चीनी मिलों की बिक्री में हुए घपले की पोल परत-दर-परत खोली थी।

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अखिलेश यादव सरकार ने सत्ता में आने पर इसकी जांच भी कराई, लेकिन मायाराज के इस काकस का अखिलेश राज में भी जलवा कायम रहा। नतीजा ये हुआ कि चीनी मिलों की बिक्री में 1180 करोड़ रुपये के घपले की जांच में किसी को भी आंच नहीं आई। मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब योगी सरकार के नए सिरे से जांच के फैसले से करोड़ों की मिलों को कौड़ियों के भाव बेचने के जिम्मेदारों की बेचैनी बढ़नी तय है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती के शासनकाल में जुलाई से अक्तूबर 2010 और जनवरी से मार्च 2011 के बीच दो चरणों में क्रमश: 10 और 11 चीनी मिलों को बेचा गया। पहले दौर की बिक्री वाली 10 मिलों को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन पोटाश लि. ने खरीदा जबकि दूसरे दौर की 11 मिलों को एक ही प्रबंधन ने अलग-अलग कंपनियों के नाम से खरीद लिया था।

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इस तरह की गई थी गड़बड़ी

sugar mill scam in Uttar Pradesh.

सीएजी ने चीनी मिलों की बिक्री पर 2012 में पेश अपनी ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा किया था कि विनिवेश, परामर्शी मूल्यांकन और कंसल्टेंसी मॉनिटरिंग के नाम पर बनाई गई आईएएस अफसरों की कमेटियों तक ने इसमें दलालों की तरह भूमिका निभाई।

सीएजी ने निष्कर्ष निकाला था कि मिलें किसे बेचनी हैं, यह बिडिंग-प्रक्रिया शुरू किए जाने से पहले तय था। बिडर्स को वित्तीय बिड भी पहले ही बता दी गई थी। इस पर भी काम नहीं बना तो बिडिंग के बीच में ही प्रक्रिया बदल दी गई।

मिलों की बिक्री के समय उसकी जमीन, प्लांट व मशीनरी की कीमत तय करने के पीछे भी खजाने को चपत लगाने की बदनीयती रही। बाद में, रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी भी कम तय कर दी गई। मिलें बेचने में सरकार को क्रमश: 841.54 करोड़ और 338.30 करोड़ रुपये यानी कुल 1179.84 करोड़ रुपये की चपत लगी।

सीएजी की नजर में गड़बड़ी
यूपी राज्य चीनी निगम लि. (यूपीएसएससीएल) की मिलों को बेचने पर 841.54 करोड़ का नुकसान हुआ।

यूपी राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम लि. (यूपीआरसीजीवीएनएल) की मिलों को बेचने की प्रक्रिया में 338.30 करोड़ रुपये की चपत लगी।

सीएजी की जांच रिपोर्ट पर सरकार की दलील

sugar mill scam in Uttar Pradesh.

सीएजी की जांच रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार की दलील थी कि चीनी मिलों के विनिवेश का हर चरण मंत्रिपरिषद से अनुमोदित है और मंत्रिपरिषद के फैसले सीएजी के ऑडिट दायरे के बाहर हैं।

...और सीएजी ने दिया था यह जवाब
सीएजी ने सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा था राज्य सरकार के 25 अप्रैल 2003 की अधिसूचना के तहत पूरी विनिवेश प्रक्रिया की लेखा परीक्षा का अधिकार उसे मिला हुआ है।

ये मिलें बिकीं
यूपीएसएससीएल की 10 मिलें  : अमरोहा, बिजनौर, बुलंदशहर, चांदपुर, जरवल रोड, खड्डा, रोहनकलां, सहारनपुर, सकौती टांडा व सिसवा बाजार।

प्रक्रिया में शामिल, लेकिन बेची नहीं जा सकी : मोहिउद्दीनपुर।

यूपीआरसीजीवीएनएल की 11 मिलें : बेतालपुर, बाराबंकी, बरेली, भटनी, चेतानी, देवरिया, गुग्ली, लक्ष्मीगंज, रामकोला, शाहगंज व हरदोई।

पौंटी चड्ढा के लिए चिंदी-चिंदी हुए थे सारे कायदे

sugar mill scam in Uttar Pradesh.

सीएजी की पड़ताल में खुलासा हुआ था कि तत्कालीन शराब व्यवसायी गुरदीप सिंह उर्फ पौंटी चड्ढा चीनी मिलों की खरीद में फायदे में रहे थे। पहले दौर में, जो मिलें उनकी कंपनी ने खरीदीं, सीएजी के मुताबिक उसमें बिडिंग करने वालीं दोनों कंपनियां एक ही थीं।

दूसरे दौर में, जिन कंपनियों ने बिड दाखिल की, उनके प्रबंधन में सभी निदेशक आपस में संबद्ध थे। बताते चलें, पौंटी का बसपा-सपा में बराबर का दखल माना जाता था। दोनों ही सरकारों में उनका एक जैसा जलवा रहा।

नीयत पर सवाल
वित्तीय बिड आने से पहले ही बिडर्स को अपेक्षित मूल्य बता दिया गया और बिड प्रक्रिया के बीच में ही बिडिंग तरीके में बदलाव कर दिया गया। इससे होने वाले नुकसान का आकलन सीएजी नहीं कर सकी। सीएजी ने कहा कि इससे लगी चपत का मौद्रिक मूल्य तय नहीं हो सकता।

गलत मूल्यांकन से 840 करोड़ की लगाई चपत

sugar mill scam in Uttar Pradesh.

यूपी राज्य चीनी निगम लिमिटेड की मिलों को बेचे जाने में हर स्तर पर खेल हुआ। बिड प्रकिया को अंजाम देने की बात हो या जमीन पर स्टांप शुल्क में छूट देने का निर्णय, सब पहले से ही तय कर दिया गया। खास कंपनी को कौड़ियों के भाव में मिलें देने के लिए अफसरों ने सारे तिकड़म लगा दिए।

पहले तो सलाहकार ने जमीन के मूल्य में ही 30 फीसदी तक कमी की। इसके बाद भूमि व भवन पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट दे दी गई। चालू हालत वाले प्लांट व मशीनरी को कबाड़ मान कर मूल्यांकन किया गया।

इसी तरह उप्र राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम लिमिटेड (यूपीआरसीजीवीएनएल) की 11 मिलों के  मूल्यांकन में गड़बड़ी मिली। मूल्यांकन में स्टांप ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन फीस आदि के कारण पांच प्रतिशत छूट दी गई।

प्लांट व मशीनरी का मूल्यांकन कम स्क्रैप मूल्य पर किया गया। 21 मिलों के मूल्यांकन व अपेक्षित मूल्य तय करने में 840.34 करोड़ की कमी की गई।

इस तरह अंजाम दिया गया घोटाले का खेल

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सीएजी ने कहा था कि मिलों के मूल्यांकन की प्रक्रिया में संशोधन से 243.48 करोड़ रुपये की चपत लगी। इसमें 192.48 करोड़ तो भवन को जमीन के साथ शामिल करने व जमीन व भवन पर अतिरिक्त छूट देने से हुआ।

चीनी मिलों के प्लांट व मशीनरी के कबाड़ की कीमत पहले 114.96 करोड़ तय की गई। बाद में इसे 32.88 करोड़ कर दिया गया।

सीएजी का कहना है कि सभी मिलें 2009-10 तक संचालित थीं। जरवल रोड, सहारनपुर, सिसवा बाजार मिलों ने वर्ष 2008-09 में और खड्डा मिल ने वर्ष 2009-10 में लाभ कमाया।

दस चालू मिलें 61 प्रतिशत से लेकर 95 प्रतिशत तक की क्षमता से चलीं।

इन मिलों की औसत उपभोग क्षमता बिकने के बाद 67 प्रतिशत से बढ़कर 81 प्रतिशत तक थी। इन्हें बेचना उचित नहीं था।

सहारनपुर की नई मिल पुरानी मिल से 13 कि मी दूर है। पुरानी जमीन पर कोई उत्पादन नहीं था। विक्रय प्रक्रिया में दोनों को एक साथ जोड़ दिया गया। इससे 223.72 करोड़ कीमत कम हो गई।

मिलों की रजिस्ट्री में निबंधन शुल्क की छूट देकर भी खरीदार पर कृपा बरसाई गई।

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