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अचानक खादी बोर्ड दफ्तर पहुंचे मंत्री, 73 कर्मचारी गायब मिले, सजा मिली

Thu, 20 Apr 2017 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 20 Apr 2017 02:18 AM IST
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sudden inspection of UP minister satyadev pachori in khadi board office.
निरीक्षण करते खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी - फोटो : amar ujala

दीवारों पर पान की पीक, कुर्सियों के नीचे कचरा और आलमारियों के ऊपर रखी फाइलों पर जमी धूल। कुछ ऐसा ही नजारा था डालीबाग स्थित खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के दफ्तर का जब विभागीय मंत्री सत्यदेव पचौरी बुधवार सुबह नौ बजकर 40 मिनट पर यहां पहुंचे। ऑफिस की स्थिति देख उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था।

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मंत्री ने निर्देश दिया कि गेट पर ताला बंद कर दिया जाए और किसी को भी अंदर ना आने दिया जाए। साथ ही सभी अनुपस्थित कर्मचारियों और अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि अगली बार इससे सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद अंदर पहुंचे और एक-एक कमरे का जायजा लेना शुरू किया।
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फाइलों पर धूल देख तो अधिकारियों को लगाई फटकार
पचौरी ने अलमारियों के ऊपर रखी फाइलों को उतरवाया और उस पर जमी धूल को अंगुली से हटाया और मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखिलेश मिश्रा की ओर मुखातिब होकर कहा यह है आपके यहां सफाई व्यवस्था?
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मंत्री ने करीब डेढ़ घंटे के निरीक्षण के दौरान बोर्ड के हर कमरे को चेक किया। सफाई व्यवस्था ठीक ना होने से अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। मंत्री एक कमरे में पहुंचे जहां फाइलों को अंबार लगा हुआ था। पूछा यह ऑफिस है या कबाड़खाना? क्या यहां इसी माहौल में काम होता है। उन्होंने पूछा कि यह सब फाइलें अगर पुरानी हैं तो इन्हें रिकार्ड रूम में क्यों नहीं रखा जा रहा है? जवाब मिला नया ऑफिस दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। अभी यह ऑफिस छोटा है और जगह कम है इस लिए यहां सारी फाइलें रखी गई हैं।

ना मुख्यमंत्री की फोटो न प्रधानमंत्री की

sudden inspection of UP minister satyadev pachori in khadi board office.

मंत्री जब मुख्य कार्यपालक अधिकारी के दफ्तर में पहुंचे तो वहां ना तो मुख्यमंत्री की फोटो थी और ना ही प्रधानमंत्री की। मंत्री ने सवाल किया कि फोटो यहां क्यों नहीं है? जवाब मिला सर आज ही लग जाएगी।

मंत्री जब दूसरी मंजिल पर निरीक्षण कर रहे थे और सामने आलोक चंद्र की नेम प्लेट लगी थी, जिसमें एक ओर उर्दू में और दूसरी ओर हिंदी में नाम लिखा था। मंत्री ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी को निर्देश दिया कि उर्दू में लिखी नेम प्लेट को हटवाइये।

ऑफिस में चारों ओर था गंदगी का अंबार
निरीक्षण के दौरान पूरी बिल्डिंग में हर तल पर गंदगी का अंबार मिला। मंत्री ने हर तल के प्रभारी डीसीईओ (उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी) को फटकार लगाई और कहा कि जल्द ही दोबारा निरीक्षण करेंगे और अब कोई चेतावनी नहीं सीधे कार्रवाई करेंगे।

मंत्री एक कमरे में पहुंचे जहां रोशनदान खुला था और एसी चल रहा था। इस पर मौजूद कर्मचारियों को फटकार लगाई। मंत्री ने अधिकारियों से सख्त लहजे में कहा कि वर्क कल्चर बदलिए। एक महीने पहले भी चेतावनी दी थी, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। अब अगली बार सीधे कार्रवाई करूंगा।

मंत्री ने गेट बंद कराया और कर्मचारियों ने खोल दिया

sudden inspection of UP minister satyadev pachori in khadi board office.

मंत्री जब दफ्तर पहुंचे तब गेट बंद करने के निर्देश दिए, लेकिन मंत्री जैसे ही अंदर पहुंचे बाहर का गेट खोल दिया गया। वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कर्मचारी अंदर आते हुए दिखाई दिए तो उन्होंने दोबारा गेट में ताला लगाने को कहा और अपने एक स्टाफ को निर्देश दिया कि कोई अंदर ना आने पाए।

नहीं मिल पाया बॉयोमेट्रिक का डाटा तो खुद की गिनती
मंत्री ने ऑफिस आए कर्मचारियों की उपस्थिति का डाटा मांगा जिसे मुख्य कार्यपालक अधिकारी उपलब्ध नहीं करा पाए। मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी को कैंपस से बाहर किया जाए और वह खुद कर्मचारियों की गिनती करेंगे।

मंत्री गेट पर खड़े हो गए और सभी कर्मचारियों को आफिस के प्रांगण में खड़ा कर दिया। एक एक कर्मचारी को बुलाकर गिनती की। मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखिलेश मिश्रा ने मंत्री को बताया कि यहां कुल 173 अधिकारी व कर्मचारी हैं, जिसमें 73 अनुपस्थित रहे।

मंत्री जी कम से कम आप तो लंगड़ा ना कहिए!

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एक दिन पहले प्रदेश सरकार ने विकलांग कल्याण विभाग का नाम बदल कर दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग किया, लेकिन उसी सरकार के मंत्री सत्यदेव पचौरी जब कर्मचारियों की उपस्थिति चेक कर रहे थे तो एक सफाई कर्मचारी उनके सामने आया जो चलने में थोड़ा लड़खड़ा रहा था।

मंत्री ने पहले कर्मचारी से उसके बारे में पूछा और फिर मुख्य कार्यपालक अधिकारी से कहा कि आपने ये लूले लंगड़ों को संविदा पर रखा हुआ है। यह क्या सफाई करेंगे।

इसीलिए आपके यहां इतनी गंदगी है। मंत्री ने पूछा कि कितना मिलता है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया पांच हजार रुपये जबकि कर्मचारी ने बताया नहीं सर चार हजार ही मिलते हैं।

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