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Lucknow News: टीबी से क्षतिग्रस्त रीढ़ की सिविल अस्पताल में सफल सर्जरी
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लखनऊ। सिविल अस्पताल में टीबी से क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डी की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार है। निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में यह सर्जरी निशुल्क की गई, जबकि निजी केंद्र में करीब तीन लाख रुपये का खर्च बताया गया था। उन्होंने सर्जरी करने वाली पूरी टीम को बधाई दी।
निदेशक ने बताया कि सिद्धार्थनगर के मधुकरपुर गांव निवासी 37 वर्षीय विनय तिवारी पिछले डेढ़ साल से कमर के गंभीर दर्द से परेशान थे। कई जगह इलाज कराने के बावजूद राहत नहीं मिली। जांच में रीढ़ की हड्डी के एल3 वर्टेब्रा में टीबी का गंभीर संक्रमण मिला। इससे स्पाइनल कॉर्ड पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा था और बाएं पैर की मांसपेशियां कमजोर हो रही थीं। डॉक्टरों ने समय पर सर्जरी नहीं होने पर पैरालिसिस का खतरा बताया।
दो घंटे चली जटिल सर्जरी
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए एल2 से एल4 वर्टेब्रा तक स्पाइनल फिक्सेशन करने का निर्णय लिया गया। न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी के नेतृत्व में करीब दो घंटे चली सर्जरी में टाइटेनियम स्क्रू और रॉड लगाकर रीढ़ को सहारा दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर है। पैरों में धीरे-धीरे ताकत लौट रही है और वह दोनों पैर हिला पा रहे हैं।
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ऑपरेशन टीम में इनका रहा सहयोग
ऑपरेशन में डॉ. विनोद तिवारी, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. राजेश, डॉ. कासिम, सिस्टर पूजा और सिस्टर किरण का सहयोग रहा।
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निदेशक ने बताया कि सिद्धार्थनगर के मधुकरपुर गांव निवासी 37 वर्षीय विनय तिवारी पिछले डेढ़ साल से कमर के गंभीर दर्द से परेशान थे। कई जगह इलाज कराने के बावजूद राहत नहीं मिली। जांच में रीढ़ की हड्डी के एल3 वर्टेब्रा में टीबी का गंभीर संक्रमण मिला। इससे स्पाइनल कॉर्ड पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा था और बाएं पैर की मांसपेशियां कमजोर हो रही थीं। डॉक्टरों ने समय पर सर्जरी नहीं होने पर पैरालिसिस का खतरा बताया।
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दो घंटे चली जटिल सर्जरी
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए एल2 से एल4 वर्टेब्रा तक स्पाइनल फिक्सेशन करने का निर्णय लिया गया। न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी के नेतृत्व में करीब दो घंटे चली सर्जरी में टाइटेनियम स्क्रू और रॉड लगाकर रीढ़ को सहारा दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर है। पैरों में धीरे-धीरे ताकत लौट रही है और वह दोनों पैर हिला पा रहे हैं।
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ऑपरेशन टीम में इनका रहा सहयोग
ऑपरेशन में डॉ. विनोद तिवारी, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. राजेश, डॉ. कासिम, सिस्टर पूजा और सिस्टर किरण का सहयोग रहा।