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Lucknow News: अध्ययन में खुलासा... मृतजन्म के 98 फीसदी मामलों में मिली देखभाल की कमी
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लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने किया अध्ययन।
सचिन त्रिपाठी
लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान प्रसवपूर्व जांच न होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आए मृतजन्म (गर्भ में ही शिशु की मृत्यु हो जाना) के 42 मामलों में से 41 मामलों में गर्भवती महिला की प्रसवपूर्व एक भी जांच नहीं हुई थी। यह अध्ययन जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में प्रकाशित हुआ है।
संस्थान के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने पैथोलॉजी विभाग के सहयोग से यह अध्ययन किया। नवंबर 2022 से अप्रैल 2024 तक मृतजन्म के 42 मामलों का गहन अध्ययन किया गया। अध्ययन में शामिल 42 महिलाओं में से अधिकांश (40.5 फीसदी) पहली बार मां बन रही थीं। माताओं की औसत आयु 28.38 वर्ष थी। इन 42 में से 41 महिलाओं (97.6 फीसदी) ने गर्भावस्था के दौरान कोई पूर्व जांच नहीं कराई थी। इस कारण होने वाली समस्या का पता नहीं चल सका और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। यह अध्ययन डॉ. सना एम. सिद्दीकी, डॉ. स्मृति अग्रवाल, डॉ. अलीना हैदर और डॉ. सौम्या शुक्ला ने किया।
आधे मामलों में भ्रूण तक रक्त की आपूर्ति हुई बाधित
अध्ययन में 47.6 फीसदी मामलों में प्लेसेंटा के माध्यम से बच्चे तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। वहीं, 21.4 फीसदी मामलों में कोरियोएम्नियोनाइटिस पाया गया। यह प्लेसेंटा और आसपास की झिल्लियों में सूजन व संक्रमण है। 19 फीसदी मामलों में बच्चे का विकास गर्भ में ही रुक गया था।
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अगली गर्भावस्था बचाने में मददगार हो सकती है गर्भनाल की जांच
विशेषज्ञों के अनुसार मृतजन्म के बाद केवल बच्चे की जांच ही नहीं, बल्कि प्लेसेंटा (गर्भनाल) की जांच भी महत्वपूर्ण है। इससे रक्त प्रवाह में कमी, संक्रमण और अन्य विकृतियों का पता लग सकता है। कारण पता चलने पर अगली गर्भावस्था में महिला की निगरानी और उपचार की रणनीति बेहतर बनाई जा सकती है।
गर्भावस्था में ये जांच जरूर कराएं
पहली तिमाही में - रक्तचाप और वजन, हीमोग्लोबिन, रक्त समूह और आरएच फैक्टर, रक्त और मूत्र की जरूरी जांच, मधुमेह व संक्रमण की स्क्रीनिंग, शुरुआती अल्ट्रासाउंड।
दूसरी व तीसरी तिमाही में-
रक्तचाप और वजन की निगरानी, हीमोग्लोबिन और शुगर, बच्चे के विकास और धड़कन की निगरानी, अल्ट्रासाउंड, उच्च जोखिम होने पर प्लेसेंटा और बच्चे के रक्त प्रवाह की विशेष जांच।
कब हो जाएं गंभीर
बच्चे की हलचल अचानक कम हो जाए या महसूस न हो, रक्तस्राव होने पर, पेट में तेज या लगातार दर्द, पानी की थैली समय से पहले फट जाए, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना या अचानक सूजन, रक्तचाप बढ़ जाए, बुखार या संक्रमण।
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लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान प्रसवपूर्व जांच न होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आए मृतजन्म (गर्भ में ही शिशु की मृत्यु हो जाना) के 42 मामलों में से 41 मामलों में गर्भवती महिला की प्रसवपूर्व एक भी जांच नहीं हुई थी। यह अध्ययन जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में प्रकाशित हुआ है।
संस्थान के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने पैथोलॉजी विभाग के सहयोग से यह अध्ययन किया। नवंबर 2022 से अप्रैल 2024 तक मृतजन्म के 42 मामलों का गहन अध्ययन किया गया। अध्ययन में शामिल 42 महिलाओं में से अधिकांश (40.5 फीसदी) पहली बार मां बन रही थीं। माताओं की औसत आयु 28.38 वर्ष थी। इन 42 में से 41 महिलाओं (97.6 फीसदी) ने गर्भावस्था के दौरान कोई पूर्व जांच नहीं कराई थी। इस कारण होने वाली समस्या का पता नहीं चल सका और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। यह अध्ययन डॉ. सना एम. सिद्दीकी, डॉ. स्मृति अग्रवाल, डॉ. अलीना हैदर और डॉ. सौम्या शुक्ला ने किया।
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आधे मामलों में भ्रूण तक रक्त की आपूर्ति हुई बाधित
अध्ययन में 47.6 फीसदी मामलों में प्लेसेंटा के माध्यम से बच्चे तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। वहीं, 21.4 फीसदी मामलों में कोरियोएम्नियोनाइटिस पाया गया। यह प्लेसेंटा और आसपास की झिल्लियों में सूजन व संक्रमण है। 19 फीसदी मामलों में बच्चे का विकास गर्भ में ही रुक गया था।
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अगली गर्भावस्था बचाने में मददगार हो सकती है गर्भनाल की जांच
विशेषज्ञों के अनुसार मृतजन्म के बाद केवल बच्चे की जांच ही नहीं, बल्कि प्लेसेंटा (गर्भनाल) की जांच भी महत्वपूर्ण है। इससे रक्त प्रवाह में कमी, संक्रमण और अन्य विकृतियों का पता लग सकता है। कारण पता चलने पर अगली गर्भावस्था में महिला की निगरानी और उपचार की रणनीति बेहतर बनाई जा सकती है।
गर्भावस्था में ये जांच जरूर कराएं
पहली तिमाही में - रक्तचाप और वजन, हीमोग्लोबिन, रक्त समूह और आरएच फैक्टर, रक्त और मूत्र की जरूरी जांच, मधुमेह व संक्रमण की स्क्रीनिंग, शुरुआती अल्ट्रासाउंड।
दूसरी व तीसरी तिमाही में-
रक्तचाप और वजन की निगरानी, हीमोग्लोबिन और शुगर, बच्चे के विकास और धड़कन की निगरानी, अल्ट्रासाउंड, उच्च जोखिम होने पर प्लेसेंटा और बच्चे के रक्त प्रवाह की विशेष जांच।
कब हो जाएं गंभीर
बच्चे की हलचल अचानक कम हो जाए या महसूस न हो, रक्तस्राव होने पर, पेट में तेज या लगातार दर्द, पानी की थैली समय से पहले फट जाए, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना या अचानक सूजन, रक्तचाप बढ़ जाए, बुखार या संक्रमण।