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Lucknow News: 47 साल पहले पढ़ा विज्ञान, अब ज्योतिर्विज्ञान में दाखिला
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लखनऊ। साल 1976 में 16 साल के रहे कृष्णदेव आज 63 साल के हो चुके हैं। उम्र के साथ पढ़ाई के प्रति उनका जुनून भी बढ़ गया है। वर्ष 1976 में उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में विज्ञान की पढ़ाई के लिए बीएससी में दाखिला लिया था। अब 47 साल बाद उन्होंने नियमित विद्यार्थी के रूप में विश्वविद्यालय के ज्योतिर्विज्ञान विभाग में दाखिला लिया है।
कृष्णदेव त्रिपाठी तीन साल पहले बीएसएनएल में उपमहाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने आराम करने के बजाय एक बार फिर से पढ़ाई का रास्ता चुना और एमए ज्योर्तिविज्ञान में दाखिला ले लिया। क्लास में भी वे नई उम्र के विद्यार्थियों के मुकाबले कहीं ज्यादा संजीदा नजर आते हैं। कृष्णदेव त्रिपाठी ने बताया कि ज्योतिष में उनकी दिलचस्पी शुरू से थी। बीएससी के बाद नौकरी मिल गई और काम के दबाव में यह लालसा दिल में दबी रह गई। सेवानिवृत्त होने के बाद एक बार फिर पढ़ने का समय मिला तो बरसों की अधूरी आस अब पूरी कर रहे हैं। इसी तरह प्रतिभा त्रिपाठी भी सेवानिवृत्त होने के बाद दोबारा पढ़ाई कर रही हैं। उनके अनुसार, ज्योतिष ऐसा विषय है जो बेहद रोचक है। इसलिए वे इसका अध्ययन करना चाहती हैं।
एमबीए-एलएलबी के बाद ज्योतिष की पढ़ाई
एमए ज्योतिर्विज्ञान की पढ़ाई करने वाले राजेश कुमार जोशी इससे पहले एमबीए और एलएलबी की डिग्री हासिल कर चुके हैं। उनके अनुसार, इन डिग्री के बाद नौकरी भी की, लेकिन पारिवारिक काम को देखते हुए अब ज्योतिष की पढ़ाई शुरू की है। अब इसी में आगे कॅरिअर बनाना है।
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ज्योतिष में बढ़ रही रुचि
ज्योतिर्विज्ञान के शिक्षक डॉ. विष्णुकांत शुक्ला और डॉ. अनुज शुक्ला ने बताया कि ज्योतिष में लोगों की रुचि बढ़ी है। इसीलिए नए विद्यार्थी ही नहीं सेवानिवृत्ति के बाद भी काफी लोग दाखिला ले रहे हैं। लविवि के प्रवक्ता प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव के अनुसार, इस तरह के विषय सभी वर्ग के लिए हैं। लविवि में ज्योतिष की पढ़ाई हिंदी माध्यम से होती है। यह भी यहां दाखिले की एक बड़ी वजह है।
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कृष्णदेव त्रिपाठी तीन साल पहले बीएसएनएल में उपमहाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने आराम करने के बजाय एक बार फिर से पढ़ाई का रास्ता चुना और एमए ज्योर्तिविज्ञान में दाखिला ले लिया। क्लास में भी वे नई उम्र के विद्यार्थियों के मुकाबले कहीं ज्यादा संजीदा नजर आते हैं। कृष्णदेव त्रिपाठी ने बताया कि ज्योतिष में उनकी दिलचस्पी शुरू से थी। बीएससी के बाद नौकरी मिल गई और काम के दबाव में यह लालसा दिल में दबी रह गई। सेवानिवृत्त होने के बाद एक बार फिर पढ़ने का समय मिला तो बरसों की अधूरी आस अब पूरी कर रहे हैं। इसी तरह प्रतिभा त्रिपाठी भी सेवानिवृत्त होने के बाद दोबारा पढ़ाई कर रही हैं। उनके अनुसार, ज्योतिष ऐसा विषय है जो बेहद रोचक है। इसलिए वे इसका अध्ययन करना चाहती हैं।
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एमबीए-एलएलबी के बाद ज्योतिष की पढ़ाई
एमए ज्योतिर्विज्ञान की पढ़ाई करने वाले राजेश कुमार जोशी इससे पहले एमबीए और एलएलबी की डिग्री हासिल कर चुके हैं। उनके अनुसार, इन डिग्री के बाद नौकरी भी की, लेकिन पारिवारिक काम को देखते हुए अब ज्योतिष की पढ़ाई शुरू की है। अब इसी में आगे कॅरिअर बनाना है।
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ज्योतिष में बढ़ रही रुचि
ज्योतिर्विज्ञान के शिक्षक डॉ. विष्णुकांत शुक्ला और डॉ. अनुज शुक्ला ने बताया कि ज्योतिष में लोगों की रुचि बढ़ी है। इसीलिए नए विद्यार्थी ही नहीं सेवानिवृत्ति के बाद भी काफी लोग दाखिला ले रहे हैं। लविवि के प्रवक्ता प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव के अनुसार, इस तरह के विषय सभी वर्ग के लिए हैं। लविवि में ज्योतिष की पढ़ाई हिंदी माध्यम से होती है। यह भी यहां दाखिले की एक बड़ी वजह है।