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परिषदीय स्कूलों में फिर बदलेगा यूनिफॉर्म का रंग

Fri, 11 Apr 2014 08:12 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला ब्यूरो,लखनऊ
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला ब्यूरो,लखनऊ Updated Fri, 11 Apr 2014 08:12 AM IST
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students uniform colour will be changed

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में फिर से यूनिफॉर्म का रंग बदलने की तैयारी है। इस बार केवल छात्राओं के यूनिफॉर्म का रंग बदला जाएगा।

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कुर्ता तो खाकी ही रहेगा लेकिन सलवार का रंग सफेद करने पर विचार हो रहा है। अभी कुर्ता और सलवार दोनों का रंग खाकी है।

इसके अलावा यह भी तैयारी है कि इस बार अगस्त से यूनिफॉर्म बांटने की प्रक्रिया शुरू कर अक्तूबर तक समाप्त कर दी जाए।

यूनिफॉर्म की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। छात्र-छात्राओं की नाप का यूनिफॉर्म सिलवाते हुए बांटा जाएगा।

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मुफ्त यूनिफॉर्म देने की व्यवस्था है।

प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद अखिलेश सरकार ने पहली बार 2013 में यूनिफॉर्म का रंग बदला था।

पहले छात्रों को आसमानी रंग की शर्ट और नीले रंग की नेकर व छात्राओं को आसमानी रंग की शर्ट तथा नीले रंग की स्कर्ट या आसमानी कुर्ता एवं नीले रंग की सलवार दी जा रही थी।


अखिलेश सरकार ने इसे बदलकर खाकी कर दिया। इसे बदलने का चाहे जो भी मकसद रहा हो पर चर्चा यह रही कि बसपा के झंडे का रंग नीला है इसलिए इसे बदला गया है।

राज्य सरकार ने 2013 में आनन-फानन में यूनिफॉर्म का रंग तो बदल दिया, लेकिन ऐसा रंग कर दिया जो देखने में अच्छा नहीं लग रहा है।

इसलिए छात्राओं के यूनिफॉर्म का रंग बदलने पर विचार किया जा रहा है। छात्राओं के स्कर्ट और सलवार का रंग सफेद करने पर विचार किया जा रहा है।

सर्व शिक्षा अभियान इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी को भेजेगा। उनकी सहमति के बाद ही इस पर निर्णय किया जाएगा।

इस बार यूनिफॉर्म को बांटने से पहले छात्रों व छात्राओं की नाप ली जाएगी और अगस्त से ही बांटने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

नहीं मिलेगा जूता और स्वेटर
राज्य सरकार परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को जूता व स्वेटर देना चाहती थी।

इसके आधार पर सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय ने भारत सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन वहां हुई प्रोजेक्ट एप्रूवल की बैठक में इसे सिरे से खारिज कर दिया गया।
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इसलिए सर्दी के मौसम में जूता और स्वेटर की उम्मीद लगाए बैठे छात्र-छात्राओं को इससे निराशा ही हुई है।

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