इस वजह से एकेटीयू में सवा लाख सीटें रह जाएंगी खाली
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) द्वारा आयोजित एसईई काउंसलिंग का दूसरा चरण भी निजी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों को राहत देता नजर नहीं आ रहा है।
इस चरण में मात्र 2,416 अभ्यर्थियों ने ही पंजीकरण कराया है। जबकि फीस जमा करने वालों की संख्या 1,750 पर ही सिमट गई। छात्रों के इस रुझान को देखकर ऐसा लग रहा है कि इस साल संबद्ध कॉलेजों में सवा लाख से अधिक सीटें रिक्त रह जाएंगी।
एकेटीयू द्वारा बीटेक, बीफॉर्मा, बीआर्क, एमबीए सहित विभिन्न कोर्स में दाखिले के लिए आयोजित एसईई में इस साल 1,48,315 अभ्यर्थियों ने क्वालिफाई किया है।
जबकि इन्हीं कोर्सेज के लिए संबद्ध कॉलेजों में 1,66,254 सीटें हैं। पहले चरण की काउंसलिंग में मात्र 7,805 अभ्यर्थियों ने ही अपना प्रवेश सुनिश्चित किया। जबकि 19 हजार ऐसे रहे जिन्होंने चॉइस के अनुसार कॉलेज मिलने पर भी प्रवेश कन्फर्म नहीं किया, बल्कि दूसरे चरण की काउंसलिंग में फ्लोट कर गए।
2,323 अभ्यर्थियों ने तो एकेटीयू से ही किनारा करते हुए विड्रॉ का विकल्प चुना है। दूसरे चरण का सीट आवंटन 11 जुलाई को किया जाएगा। एसईई समन्वयक प्रो. केएन उपाध्याय ने बताया कि दूसरे चरण में शुक्रवार शाम चार बजे तक 1,450 अभ्यर्थी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करा चुके थे।
इस चरण में सीट पाने वाले अभ्यर्थी 12 जुलाई तक प्रवेश कन्फर्म करेंगे। यदि अभ्यर्थी सीट फ्रीज, फ्लोट या विड्रॉ में से किसी विकल्प का चयन नहीं करेगा तो उसका प्रवेश अपने आप विड्रॉ हो जाएगा और नियमानुसार कटौती के बाद पंजीकरण राशि वापस होगी।
इस साल एकेटीयू ने एसईई काउंसलिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए पहली से लेकर अंतिम रैंक तक के सभी अभ्यर्थियों को एक साथ काउंसलिंग में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी।
वर्तमान स्थिति को देखें तो 7,805 सीटों पर दाखिला हो चुका है। इसके अलावा 19 हजार अभ्यर्थी इस चरण में फ्लोट होकर आए तो 1,750 नए अभ्यर्थियों ने फीस जमा की।
काउंसलिंग के माध्यम से आने पर ही मिलेगी छात्रवृत्ति
यदि फीस जमा करने वाले और फ्लोट से आए सभी अभ्यर्थी दाखिला ले भी लें तो एकेटीयू के कॉलेजों की कुल सीटों में मात्र 28,500 के करीब सीटें ही भरती नजर आ रही हैं।
दूसरे चरण में जिस तरह से पंजीकरण हुए हैं उसके बाद आगे के चरण से भी अधिक उम्मीद नहीं दिखती। ऐसे में तो 1,30,000 सीटें रिक्त रहने की पूरी आशंका है।
पहले चरण की काउंसलिंग के बाद सूबे में 600 से अधिक निजी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में से 233 ऐसे रहे हैं जिनका खाता तक नहीं खुला।
इनमें 26 कॉलेज लखनऊ के भी हैं। दूसरे चरण में जिन 1,750 अभ्यर्थियों ने फीस जमा की वह पूरे प्रदेश से हैं। ऐसे में सन्नाटे की मार झेल रहे कॉलेजों की झोली दूसरे चरण में भी खाली ही दिख रही है।
अभी तक तो सीटें रिक्त रहने पर निजी कॉलेज सीधे प्रवेश करके भर लेते थे। इन सीटों पर अधिकतर एससी-एसटी वालों को जीरो फीस पर प्रवेश दिया जाता।
इसका लाभ यह होता कि कॉलेज को इनकी फीस छात्रवृत्ति के रूप में मिलना तय हो जाता था, लेकिन इस साल समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल उन्हीं छात्रों को छात्रवृत्ति मिलेगी जो काउंसलिंग के माध्यम से आएंगे। ऐसे में कॉलेजों को इस बार सीधे प्रवेश का लाभ नहीं मिलेगा।