दरिंदों ने छात्रा को दिए जख्म, केस दर्ज कराने गए पिता को चौकी इंचार्ज ने धमकाया और बोले ...
सामूहिक दुष्कर्म की शिकार इस छात्रा को एक माह तक मुकदमा दर्ज कराने के लिए न सिर्फ पुलिस टरकाती रही बल्कि आरोपियों से समझौता करने के लिए दबाव भी डाला। पीड़िता के पिता से सादे कागज पर पुलिस ने जबरन दस्तखत तक करा लिए। पुलिस के उत्पीड़न से तंग आकर छात्रा ने आला अफसरों से लेकर मुख्यमंत्री और महिला आयोग तक गुहार लगाई। तब जाकर एक माह बाद पुलिस ने आरोपियों पर केस दर्ज किया।
गुडंबा थानाक्षेत्र में रहने वाली 19 वर्षीय एक दलित छात्रा को उसके गांव के ही विपिन सिंह ने 23 अगस्त को नौकरी देने के लिए अपने घर बुलाया था। वह अपने मूल शैक्षिक प्रमाण पत्र लेकर पहुंच गई। वहां गांव के शकील व तीन-चार अज्ञात युवक पहले से मौजूद थे। आरोपियों ने कई सादे कागज व सादे स्टाम्प पर हस्ताक्षर करवाकर शैक्षिक प्रमाणपत्र ले लिए।
उसके बाद उसे शहर के एक मकान में बंधक बनाकर आठ दिन तक रखा गया। आरोप है कि खाने में नशीला पदार्थ खिलाकर विपिन व शकील उसके साथ जबरदस्ती करते थे। विरोध करने पर जमकर मारपीट करते थे। पीड़िता ने मुताबिक, कुछ दिन रिश्तेदारों के यहां खोजबीन करने के बाद पिता ने गढ़ी चौकी में शिकायत की। दबाव बढ़ने पर 31 अगस्त को आरोपी उसे सेंट मेरी हॉस्पिटल के पास छोड़कर भाग गए।
बहनों से भी बदसुलूकी
आंखों में आंसू भरे पीड़िता का किसान पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए पुलिस की चौखट पर बार-बार दस्तक देता रहा लेकिन पुलिस नहीं पसीजी। आरोप है कि 31 अगस्त को उनकी बेटी अपने पिता, मां और मौसी संग गढ़ी चौकी गई और शिकायत की। आरोप है कि चौकी प्रभारी ने आठ घंटे तक उसे बैठाए रखा।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों को बुलाया है। उनके आने के बाद केस दर्ज कर लिया जाएगा। कुछ देर बाद चौकी प्रभारी ने पिता पर दबाव बनाया कि तुम्हारी बेटी लौट आई है, अब लिखकर दे दो कि कोई कार्रवाई नहीं करानी है। इनकार पर धमकाते हुए सादे कागज पर दस्तखत करा लिए।
रात नौ बजे तक चौकी पर पीड़िता आरोपियों का इंतजार करती रही। दूसरे दिन फिर थाने गए। वहां भी सुनवाई नहीं हुई। तीन दिन थाने के चक्कर लगाए। न तो मेडिकल जांच कराई और न ही मुकदमा दर्ज किया। पीड़िता के मुताबिक, पुलिस से शिकायत पर आरोपी विपिन रात को शराब के नशे में उसके घर आ धमका और बहनों से बदसुलूकी की।
धमकी दी कि तहरीर वापस ले लो नहीं तो बहनों से भी दुष्कर्म करूंगा। आरोप है कि आरोपियों ने उसके बहनों के कपड़े फाड़ दिए और जातिसूचक गालियां दीं। इसके बाद अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग, मुख्यमंत्री, डीजीपी को पत्र लिखा। महिला आयोग व अनुसूचित जाति आयोग ने डीसीपी उत्तरी को पत्र भेजकर कार्रवाई करने को कहा।
एसीपी से कराई जांच
पीड़िता के पिता ने लापता होने की मौखिक सूचना दी थी। इसके बाद जब लड़की वापस आई तो कार्रवाई न कराने की बात कही। सप्ताहभर बाद डीसीपी उत्तरी कार्यालय में तहरीर दी गई। जांच के बाद पीड़िता का बयान दर्ज कराया गया। फिर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया। - रीतेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक गुडंबा