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Lucknow News: कैंपस लोकतंत्र को बचाने के लिए छात्र संगठनों को एक होना होगा
Sun, 08 Feb 2026 02:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 08 Feb 2026 02:24 AM IST
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एसएफआई का दो दिवसीय राज्य सम्मेलन शुरू हुआ।
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लखनऊ। हुसैनाबाद स्थित नेहरू युवा केंद्र के सभागार में शनिवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) छात्र संगठन का दो दिवसीय 17वां उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन आयोजित हुआ। वक्ताओं ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय कैंपस से लोकतंत्र खत्म हो रहा है। छात्रों की आपसी लड़ाई की वजह से जरूरी समस्याएं पीछे हो जा रही हैं। कैंपस में यदि लोकतंत्र को बचाना है तो सभी छात्र संगठनों को एक होना होगा।
मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. सूरज बहादुर थापा ने कहा कि विश्वविद्यालय में पीएचडी अब समझौतावाद के आधार पर पूरी हो रही है। विद्यार्थी पीड़ित है लेकिन, उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों में एक वर्ग का राज चल रहा रहा है। यदि यह सब खत्म करना है तो कैंपस में लोकतंत्र को बचाना बहुत जरूरी है।
एसफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एमएजी ने कहा कि देश व प्रदेश में सरकारी स्कूलों में ताला लग रहा है। छात्रवृत्ति में कटौती हो रही है। फीस में बढ़ोतरी हो रही है लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। शिक्षण संस्थानों में छात्र हर स्तर पर प्रताड़ित हो रहे हैं लेकिन उनकी आवाज सुनने वाल कोई नहीं हुई है। एसएफआई के अखिल भारतीय सह सचिव आयशी घोष ने ने बताया कि कि सीयूईटी, नीट और जेईई जैसी मुख्य परीक्षाओं की फीस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिससे सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश नहीं हो पा रहा है। यूजीसी का विरोध सही नहीं है। सम्मेलन पर प्रदेशभर छात्र संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए।
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मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. सूरज बहादुर थापा ने कहा कि विश्वविद्यालय में पीएचडी अब समझौतावाद के आधार पर पूरी हो रही है। विद्यार्थी पीड़ित है लेकिन, उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों में एक वर्ग का राज चल रहा रहा है। यदि यह सब खत्म करना है तो कैंपस में लोकतंत्र को बचाना बहुत जरूरी है।
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एसफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एमएजी ने कहा कि देश व प्रदेश में सरकारी स्कूलों में ताला लग रहा है। छात्रवृत्ति में कटौती हो रही है। फीस में बढ़ोतरी हो रही है लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। शिक्षण संस्थानों में छात्र हर स्तर पर प्रताड़ित हो रहे हैं लेकिन उनकी आवाज सुनने वाल कोई नहीं हुई है। एसएफआई के अखिल भारतीय सह सचिव आयशी घोष ने ने बताया कि कि सीयूईटी, नीट और जेईई जैसी मुख्य परीक्षाओं की फीस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिससे सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश नहीं हो पा रहा है। यूजीसी का विरोध सही नहीं है। सम्मेलन पर प्रदेशभर छात्र संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए।

एसएफआई का दो दिवसीय राज्य सम्मेलन शुरू हुआ।
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