हिंदी साहित्य से जुड़कर खुद को संवार रहे हैं भावी इंजीनियर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसका मकसद है कि भावी इंजीनियर जब डिग्री लेकर निकले तो सिर्फ किताबी कीड़े बनकर न रह जाए। उनकी सोशल स्किल अच्छी हो, वे समाज से जुड़ें और उसके लिए काम भी करें।
आईईटी के विद्यार्थियों ने दो-तीन साल पहले अपना क्लब ‘एक्सेलसियर’ बनाया। यह अपने बीच के स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग के साथ साहित्य से जोड़ने, हिंदी लिखने-बोलने, उनकी क्षमता विकसित कर रहा है।
इसके लिए क्लब समय-समय पर इससे जुड़े वाद-विवाद, सृजनात्मक लेखन, भाषण, ग्रुप डिस्कशन, कविता पाठ, साहित्य से जुड़ी प्रतियोगिता करवाता है।
मंच पर युवा दिखाते हैं अपना हुनर
इससे जुड़े विद्यार्थियों ने बताया कि यह क्लब साहित्य से जुड़े लोगों का एक मंच है, जहां युवा अपना हुनर दिखाते हैं। समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को इसके लिए तैयार भी किया जाता है।
इसमें उन युवाओं को मेंटर के रूप में रखा जाता है जो हिंदी बैकग्राउंड से आते हैं और उनका इस पर अच्छा नियंत्रण होता है। ये न सिर्फ अन्य युवाओं को लिखना-पढ़ना बताते हैं, बल्कि उनकी पूरी कोचिंग करते हैं।
इसके साथ यहां के युवा समय-समय पर आईआईएम, आईआईटी, बीएचयू में होने वाली साहित्य से जुड़ी प्रतियोगिताओं में शामिल होते और पुरस्कार भी जीतते हैं।
क्लब समन्वयक मो. फैसल व जयेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि हम हर साल नए सदस्य बनाते हैं। उनका चयन भी लेख परीक्षण और इंटरव्यू से होता है। इसके बाद हम हर हफ्ते, 15 दिन में वैश्विक व राष्ट्रीय नीतियों, वाद-विवाद प्रतियोगिता करवाते हैं।
इसमें किताबों, लेखकों, कवियों और उनकी रचनाओं पर विस्तार से चर्चा होती है। इनसे जुड़ी प्रश्नोत्तरी व सृजनात्मक लेखन जैसे कार्यक्रम भी कराए जाते हैं।
सौहार्दपूर्ण माहौल में करते हैं एक-दूसरे की मदद
जब किसी कार्यक्रम का ऑडिशन होता है तो सीखने वालों को वरीयता देते हैं। इसमें अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स नेतृत्व करते हैं और नए विद्यार्थियोें को हिंदी और अंग्रेजी दोनों सिखाते हैं।
ऐसे कार्यक्रमों से जूनियर व सीनियर के बीच में संबंध भी अच्छे होते हैं। इसका ही असर है कि संस्थान में कभी किसी तरह का आपसी विवाद नहीं होता और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी अपना कोर्स पूरा करते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन आयोजन हो रहे हैं।