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मुख्तार अंसारी के बहाने सीएम योगी के कड़े संदेश, जातीय गोलबंदी तोड़ने की कोशिश
Fri, 28 Aug 2020 09:51 AM IST
शाहरुख खान
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 28 Aug 2020 09:51 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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राजधानी के डालीबाग में बृहस्पतिवार सुबह माफिया मुख्तार अंसारी के उन अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चल गया जिनके हटने या गिरने को लोग आसान नहीं समझते थे। जमीन खाली होना तो दूर लोग इस तरफ देखने से भी डरते थे कि कहीं मुख्तार का कोई गुर्गा कुछ और न समझ बैठे।
इससे पहले बुधवार को माफिया अतीक अहमद की प्रयागराज में संपत्तियों की कुर्की की गई। इन कार्रवाई से योगी सरकार ने आपराधिक छवि वाले राजनेताओं को कानून के दायरे में रहने का संदेश देते हुए साफ कर दिया कि प्रदेश में सिर्फ कानून का शासन चलेगा न कि दबंगई का।
हालांकि यह संदेश भविष्य में कितना विस्तार पाएगा यह कहना मुश्किल है, क्योंकि सियासी लबादा ओढ़़े या प्रभावी राजनीतिक संरक्षण में काम करने वालों की फेहरिस्त लंबी है। कई ने अपने आपराधिक कारनामों को कानूनी दांवपेंच में उलझाकर बचाव की पेशबंदी कर रखा है। इसके सहारे सरकार ने जातीय गोलबंदी का भी जवाब देने की कोशिश की है।
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मुख्तार के अवैध निर्माणों पर चले बुलडोजर ने यह बता दिया कि कानून को हाथ में लेने पर सिर्फ विकास दुबे के अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चलता बल्कि मुख्तार पर भी चलता है। कोई दूसरा होगा तो उसके साथ भी ऐसा ही बर्ताव होगा।
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इससे पहले बुधवार को माफिया अतीक अहमद की प्रयागराज में संपत्तियों की कुर्की की गई। इन कार्रवाई से योगी सरकार ने आपराधिक छवि वाले राजनेताओं को कानून के दायरे में रहने का संदेश देते हुए साफ कर दिया कि प्रदेश में सिर्फ कानून का शासन चलेगा न कि दबंगई का।
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हालांकि यह संदेश भविष्य में कितना विस्तार पाएगा यह कहना मुश्किल है, क्योंकि सियासी लबादा ओढ़़े या प्रभावी राजनीतिक संरक्षण में काम करने वालों की फेहरिस्त लंबी है। कई ने अपने आपराधिक कारनामों को कानूनी दांवपेंच में उलझाकर बचाव की पेशबंदी कर रखा है। इसके सहारे सरकार ने जातीय गोलबंदी का भी जवाब देने की कोशिश की है।
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मुख्तार के अवैध निर्माणों पर चले बुलडोजर ने यह बता दिया कि कानून को हाथ में लेने पर सिर्फ विकास दुबे के अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चलता बल्कि मुख्तार पर भी चलता है। कोई दूसरा होगा तो उसके साथ भी ऐसा ही बर्ताव होगा।
निश्चित रूप से सरकार ने इस बहाने आपराधिक छवि वाले ब्राह्मणों पर ही कार्रवाई के आरोपों का भी जवाब दिया है। इसके अलावा सरकार ने हाल में ही भदोही से विधायक व कई आपराधिक घटनाओं में आरोपी विजय मिश्र के खिलाफ कार्रवाई पर लगने वाले आरोपों को भी निराधार साबित करने का प्रयास किया है।
ये भी है संदेश
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बाहुबल से चुनाव जीतकर विशेषाधिकार की आड़ में अब वे अपने काले कारनामों के अंजाम से बच नहीं पाएंगे। वह दिन नहीं रहे जब धनबल, बाहुबल और सियासी बल का गठजोड़ सत्ता और व्यवस्था को धोखा देकर कानूनी दांवपेंचों से अवैध निर्माणों को बचाए रख सकता था।
ये मामले बताते हैं बहुत कुछ
सरकार ने मुख्तार से पहले पूर्व मंत्री आजम खां के अवैध निर्माणों पर प्रहार फिर प्रयागराज के अतीक अहमद पर कानून के शिकंजे से बहुत कुछ साफ करने की कोशिश की है। बसपा के पूर्व सांसद दाऊद अहमद के अवैध निर्माणों पर भी सरकार बुलडोजर चलवा चुकी है।
राजधानी से दूर होने के कारण मामले चर्चा में भले ही नहीं आए लेकिन इसी महीने मुख्तार के अलावा उनके करीबी मन्ना सिंह हत्याकांड में सह अभियुक्त त्रिदेव ग्रुप के मालिक उमेश सिंह और उनके भाई राजन सिंह, मछली माफिया पारस सोनकर, गैंगस्टर रमेश सिंह उर्फ काका के विरुद्ध कार्रवाई से भी लोगों में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने की कोशिश हुई है।
ये भी है संदेश
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बाहुबल से चुनाव जीतकर विशेषाधिकार की आड़ में अब वे अपने काले कारनामों के अंजाम से बच नहीं पाएंगे। वह दिन नहीं रहे जब धनबल, बाहुबल और सियासी बल का गठजोड़ सत्ता और व्यवस्था को धोखा देकर कानूनी दांवपेंचों से अवैध निर्माणों को बचाए रख सकता था।
ये मामले बताते हैं बहुत कुछ
सरकार ने मुख्तार से पहले पूर्व मंत्री आजम खां के अवैध निर्माणों पर प्रहार फिर प्रयागराज के अतीक अहमद पर कानून के शिकंजे से बहुत कुछ साफ करने की कोशिश की है। बसपा के पूर्व सांसद दाऊद अहमद के अवैध निर्माणों पर भी सरकार बुलडोजर चलवा चुकी है।
राजधानी से दूर होने के कारण मामले चर्चा में भले ही नहीं आए लेकिन इसी महीने मुख्तार के अलावा उनके करीबी मन्ना सिंह हत्याकांड में सह अभियुक्त त्रिदेव ग्रुप के मालिक उमेश सिंह और उनके भाई राजन सिंह, मछली माफिया पारस सोनकर, गैंगस्टर रमेश सिंह उर्फ काका के विरुद्ध कार्रवाई से भी लोगों में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने की कोशिश हुई है।
इन पर कस सकता है शिकंजा
मुख्तार के खिलाफ कार्रवाई से सियासत में अलग-अलग तरह से सक्रिय उन नामों को जरूर दहशत में डाल दिया होगा जिन्होंने कानून और खाकी से बचने के लिए खादी का बाना धारण कर लिया है। इनमें बृजेश सिंह, विनीत सिंह, रामू द्विवेदी, अतुल राय, धनंजय सिंह, अभय सिंह, बबलू श्रीवास्तव, सोनू सिंह और मोनू सिंह जैसे कई नाम शामिल हैं।
सरकार में दम
वैसे तो बड़े अपराधियों-माफिया पर कोई कार्रवाई समाज को अच्छा संदेश ही देती है। छोटे अपराधियों को लगेगा जब अतीक और मुख्तार के साथ ऐसा हो सकता है तो उनकी क्या बिसात। मुख्तार जैसे राजनीतिक वर्चस्व रखने वाले आपराधिक छवि के लोगों पर कार्रवाई कानून की ताकत और समाज की शांति को लेकर बड़ा संदेश होती है।
एक तो ऐसी कार्रवाई से राजनीति की आड़ में अपराधों को अंजाम देने वालों के तो हौसले टूटते ही हैं तो वह भी दहशत में आ जाते हैं जो सिर्फ अपराध की दुनिया में ही सक्रिय होते हैं। लोगों को भरोसा होता है कि सरकार में दम है और इसके काम दमदार हैं।
डॉ. ए.के. वर्मा, निदेशक, सेंटर फॉर दि स्टडी ऑफ सोसायटी एंड पॉलिटिक्स, कानपुर
सरकार में दम
वैसे तो बड़े अपराधियों-माफिया पर कोई कार्रवाई समाज को अच्छा संदेश ही देती है। छोटे अपराधियों को लगेगा जब अतीक और मुख्तार के साथ ऐसा हो सकता है तो उनकी क्या बिसात। मुख्तार जैसे राजनीतिक वर्चस्व रखने वाले आपराधिक छवि के लोगों पर कार्रवाई कानून की ताकत और समाज की शांति को लेकर बड़ा संदेश होती है।
एक तो ऐसी कार्रवाई से राजनीति की आड़ में अपराधों को अंजाम देने वालों के तो हौसले टूटते ही हैं तो वह भी दहशत में आ जाते हैं जो सिर्फ अपराध की दुनिया में ही सक्रिय होते हैं। लोगों को भरोसा होता है कि सरकार में दम है और इसके काम दमदार हैं।
डॉ. ए.के. वर्मा, निदेशक, सेंटर फॉर दि स्टडी ऑफ सोसायटी एंड पॉलिटिक्स, कानपुर