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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल: जिम्मेदारी आईएएस की, खामियाजा कर्मियों के हिस्से, सीधी तैनाती भी है गुस्से की वजह

Sun, 19 Mar 2023 08:00 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 19 Mar 2023 08:00 AM IST
सार

कर्मचारियों का तर्क है कि आईएएस अफसर निगम के महत्वपूर्ण पद पर रहते हैं। वे नीति निर्धारण करते हैं। लेकिन घाटे का ठीकरा कर्मचारियों के सिर फोड़ दिया जाता है। घाटा होने पर उनकी कोई जिम्मेदारी निश्चित नहीं की जाती है। 

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Strike of electricity workers responsibility of IAS direct deployment is also the reason for anger
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में बिजली कर्मियों की हड़ताल की बड़ी वजह निगम में अभियंताओं के बजाय आईएएस अफसरों की तैनाती भी है। हड़ताल करने वाले कर्मचारियों का तर्क है कि चेयरमैन से प्रबंध निदेशक के पद तक आईएएस अफसर बैठा दिए जाते हैं। वे साल दो साल में बदल जाते हैं। कायदे-कानून वे बनाते-बिगाड़ते हैं। लेकिन, निगम के घाटे का खामियाजा कर्मचारियों के सिर फोड़ दिया जाता है। 
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इससे बिजली कर्मियों का दोहरा शोषण हो रहा है। हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों की प्रमुख मांग में ऊर्जा निगमों के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों का चयन समिति के जरिए किया जाना शामिल है। वर्ष 2015 से पहले चयन कमेटी के जरिए प्रबंध निदेशक चुने जाते थे। 
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इसके लिए बिजली अभियंता और आईएएस दोनों आवेदन करते थे। लेकिन धीरे-धीरे इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया। लंबे समय से सीधे शासन से प्रबंध निदेशक की तैनाती की जा रही है। वर्तमान में तो पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक के साथ सभी वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक भी आईएएस अधिकारी ही हैं।
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कर्मचारियों का तर्क है कि आईएएस अफसर निगम के महत्वपूर्ण पद पर रहते हैं। वे नीति निर्धारण करते हैं। लेकिन घाटे का ठीकरा कर्मचारियों के सिर फोड़ दिया जाता है। घाटा होने पर उनकी कोई जिम्मेदारी निश्चित नहीं की जाती है। इसी तरह प्रदेश में करीब 70 हजार संविदा और 33 हजार नियमित कर्मचारी हैं। उत्पादन निरंतर होता है। अधिक उत्पादन होने का लाभ अफसर लेते हैं। उत्पादन घटने पर कर्मचारियों का बोनस काट दिया जाता है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर कहते हैं कि उत्पादन घटने और राजस्व घाटा होने पर जिस तरह से कर्मचारियों की कटौती की जाती है, उसी तरह से प्रबंधन के वेतन भुगतान में भी कटौती होना चाहिए। संघर्ष समिति की प्रमुख मागों में प्रबंधन के पदों पर चयन कमेटी के जरिए करने की मांग की गई है।

 

निगम में कार्यरत आईएएस
एम देवराज, अध्यक्ष पावर कारपोरेशन
पंकज कुमार, प्रबंध निदेशक पावर कारपोरेशन

भवानी सिंह खगरौत, एमडी मध्यांचल
शंभू कुमार,एमडी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम

अमित किशोर, एमडी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम
सैमुअल पी, एमडी केस्को कानपुर
 

देर रात तक दर्ज कराई गई रिपोर्ट
प्रदेश में विभिन्न विद्युत वितरण निगमों में शनिवार देर रात तक रिपोर्ट दर्ज कराने और बर्खास्त करने का सिलसिला जारी रहा। दोपहर तक 1332 संविदा कर्मियों को निलंबित किया गया था। रात करीब 10 बजे तक यह संख्या दो हजार से अधिक हो गई है।

इन पर हुए एस्मा के तहत कारवाई
एस्मा में 22 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, जीवी पटेल, मनीष कुमार मिश्रा, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, पीके दीक्षित, शशिकांत श्रीवास्तव, मो वसीम, योगेंद्र कुमार, विशंभर सिंह, राम सहारे वर्मा, शंभू रतन दीक्षित, पीएस बाजपेयी, जीपी सिंह, रफीक अहमद, देवेंद्र पांडेय, छोटे लाल दीक्षित, आरवाई शुक्ला, चंद्रभूषण उपाध्याय, प्रभात सिंह शामिल हैं।
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