फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   strategy behind appointing raj babbar as congress chief

खलनायिकी से फिल्मी करियर बचाने वाले राज बब्बर क्या कांग्रेस को बचा पाएंगे?

Wed, 13 Jul 2016 12:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 13 Jul 2016 12:04 PM IST
विज्ञापन
strategy behind appointing raj babbar as congress chief
राज बब्बर यूपी कांग्रेस के नए अध्यक्ष

बालीवुड में खलनायिकी के जरिये अपने फिल्मी कॅरिअर को बचाए रखने वाले राज बब्बर क्या यूपी कांग्रेस में जान फूंक पाएंगे? राज बब्बर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सियासी गलियारों में ऐसी ही प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। 

विज्ञापन


पिछले लोकसभा चुनाव से पहले केवल 12 रुपये में मुंबई में भर पेट भोजन की वकालत कर विवादों में घिरे राज बब्बर को गाजियाबाद में भाजपा उम्मीदवार वीकेसिंह से करारी हार का सामना करना पड़ा था। बब्बर न केवल गाजियाबाद में कांग्रेस के उम्मीदवार थे बल्कि पार्टी ने उन्हें अपना प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष भी बनाया था। 
विज्ञापन


कांग्रेस के पक्ष में आने वाले नतीजे गवाह हैं कि राज बब्बर को पार्टी के प्रचार प्रभारी के तौर पर कितनी बड़ी नाकामी मिली थी। इसके बावजूद यूपी में डगमगाती कांग्रेस की नैया संभालने का जिम्मा सौंपने को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वह भी तब जबकि 2019 से पहले यूपी के सबसे कठिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के  सामने खुद को प्रदेश में पुनर्जीवित करने की बड़ी चुनौती है। वैसे कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग से आने वाले राज बब्बर के साथ ही दलित, अल्पसंख्यक व सवर्ण खास तौर पर ब्राह्मण वर्ग को साधे रखने के लिए पार्टी में एक साथ वरिष्ठ उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी साथ-साथ कर दी। 

सुस्त पार्टी में हलचल की उम्मीद

strategy behind appointing raj babbar as congress chief
raj babbar - फोटो : फाइल फोटो

राज बब्बर की ताजपोशी और ठीक चुनाव से पहले संगठन में बदलाव से कांग्रेस को चुनाव में कितना फायदा होगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन इतना तो तय माना जा रहा है कि सुस्त पड़ी पार्टी में थोड़ी-बहुत हलचल जरूर पैदा होगी। 

चुनावी नफा-नुकसान का आकलन करते हुए कांग्रेस आलाकमान ने निर्मल खत्री को स्क्रीनिंग कमेटी की कमान सौंपकर उन्हें भी संतुष्ट रखने की कोशिश की है। निर्मल खत्री के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के भीतर से प्रदेश कांग्रेस की बागडोर किसी ब्राह्मण नेता को सौंपने की खबरें आ रही थीं। कई नाम चर्चा में भी थे। 

लेकिन मंगलवार शाम को अप्रत्याशित रूप से राज बब्बर के  नाम का एलान कर दिया गया। पार्टी ने जिन्हें वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया है उनमें सहारनपुर के इमरान मसूद तेज-तर्रार मुस्लिम नेता माने जाते हैं। ये वही मसूद हैं जिन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद उत्तेजक बयान दिया था। 

भड़काऊ भाषण पर हुई थी आलोचना

strategy behind appointing raj babbar as congress chief
राज पर ट‌िकीं कांग्रेस की उम्मीदें

बोटी-बोटी काटने वाले बयान को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। पिछले लोकसभा चुनाव में भड़काऊ भाषण देकर वह सुर्खियों में आए थे और इसके लिए उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा था। पूर्व विधायक भगवती प्रसाद चौधरी दलित नेता हैं और लंबे समय से अनुसूचित जाति विभाग से जुड़े हैं। 

वाराणसी के पूर्व सांसद राजेश मिश्र ब्राह्मण हैं जबकि कानपुर के पूर्व सांसद राजा रामपाल पिछड़ी जाति के हैं। इन वरिष्ठ उपाध्यक्षों के जरिये पार्टी की कोशिश वोट बैंक सहेजने तथा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संदेश देने की है।

चूंकि प्रदेश में सियासी तौर पर कांग्रेस पूरी तरह हाशिये पर है इसलिए आलाकमान चुनाव के वक्त किसी ऐसे चेहरे को आगे करना चाहता है जो पार्टी को कम से कम चर्चा में रख सके। वैसे एक वर्ग यह भी मानता है कि राज बब्बर केग्लैमर का चुनाव में कांग्रेस को कुछ लाभ भी मिल सकता है। चुनाव के मौके पर भीड़ जुटाकर माहौल बनाने में वह सफल हो सकते हैं।

राज बब्बर स्वर्णकार जाति (पिछड़ी जाति) से आते हैं। भाजपा समेत सभी दलों का पिछड़ी जाति पर जोर केलिहाज से उनकी नियुक्ति को अहम और विरोधी दलों केकाट के तौर पर देखा जा रहा है। 

कांग्रेस ने भाजपा की काट करते हुए पिछड़ी जाति का ही प्रदेश अध्यक्ष देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी नजर भी सूबे में 54 फीसदी ओबीसी वोटों पर है। अभी इन वोटों पर सपा का कब्जा है। कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकारों की मानें तो चूंकि राज बब्बर सपा से भी जुड़े रहे हैं इसलिए उसकी काट भी तलाश सकते हैं।

राहुल गांधी का भरोसेमंद माना जाता है

strategy behind appointing raj babbar as congress chief
राहुल गांधी - फोटो : Getty

राज बब्बर ऐसे नेता हैं जो राष्ट्रीय राजनीति में पूरी तरह जम चुके हैं। 1989 में वीपी सिंह के  नेतृत्व वाले जनता दल से राजनीति शुरू करने वाले बब्बर बाद में सपा में शामिल हो गए थे। वे दो बार आगरा व एक बार फीरोजाबाद के सांसद रह चुके हैं। इस समय उत्तराखंड से राज्य सभा सांसद हैं। बब्बर को राहुल गांधी का भरोसेमंद माना जाता है।

कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव में सभी प्रकार के हथकंडे अपनाने में जुटी है। सबसे पहले प्रदेश प्रभारी के रूप में मुस्लिम फेस गुलाम नबी आजाद को सामने लाया गया।
 
इसके साथ ही कांग्रेस की नजर ब्राह्मण व ओबीसी वोटों पर है। कांग्रेस को लग रहा है कि यह दोनों वोट अगर उसे मिल जाएंगे तो मुस्लिम वोट अपने-आप भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस के साथ आ जाएगा। इसलिए ओबीसी प्रदेश अध्यक्ष देने के बाद अब कांग्रेस इलेक्शन कैंपेन कमेटी में ब्राह्मण चेहरा लेकर आएगी।

पार्टी चुनावी मौके पर किसी की भी नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। यही कारण है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने के बाद पार्टी ने डॉ. निर्मल खत्री को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी है। उन्हें पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बना दिया है। एक बड़े पद से हटाकर निर्मल खत्री को एक सम्मानजनक पद दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed