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इंदिरा सरकार से जब खफा हुईं महादेवी वर्मा, जानें- पूरा माजरा
Fri, 06 Dec 2019 04:51 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 06 Dec 2019 04:51 PM IST
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महादेवी वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ कवयित्री महादेवी वर्मा छायावादी कविताओं के शीर्ष चार प्रमुख नामों में शामिल हैं। महिलाओं की शिक्षा के लिए उन्होंने काफी काम किया। वह विधान परिषद की सदस्य भी रहीं। एक ही सदन का सदस्य होने के नाते प्रो. पं. हरिकृष्ण अवस्थी को भी उनका स्नेह प्राप्त रहा जो लखनऊ विवि के कुलपति भी रहे।
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अवस्थी ने उनसे जुड़ा एक संस्मरण लिखा है, ‘ महादेवी वर्मा को जवाहर लाल नेहरू सहित देश के कई बड़े नेता काफी सम्मान देते थे। एक दिन मैं उनके साथ बैठा हुआ था। उन दिनों देश में आपातकाल लग चुका था। इंदिरा गांधी की सरकार थी। इसी पर चर्चा चल रही थी।
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तभी यह खबर आई कि हिंदी के विद्वान और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. रघुवंश पर तार काटने का आरोप लगा है। पुलिस ने मुकदमा लिखा है कि वे (रघुवंश) खंभे पर चढ़कर तार काट रहे थे। डॉ. रघुवंश दोनों हाथ से दिव्यांग थे। वे पैर के अंगूठे के सहारे लिखते थे। पानी उन्हें कोई और पिलाता था क्योंकि वे गिलास नहीं पकड़ सकते थे।
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‘सत्तामोह और पुत्रमोह मेंं हो रहा है यह सब
महादेवी जी बोलीं, ‘सुना! रघुवंश पर भी केस लगा दिया गया। जो गिलास नहीं पकड़ सकते वे खंभे पर चढ़कर तार कैसे काट रहे थे, इसका उत्तर तो ‘पुलिसिया महाप्रभु’ ही दे सकते हैं। इस स्वतंत्र देश में विद्वानों, साहित्यकारों और शांतिप्रिय नागरिकों की यही गति है।’
उनका शरीर कांपने लगा और आंसू निकलने लगे। बोलीं, ‘सत्तामोह और पुत्रमोह में यह सब हो रहा है। जवाहर भाई के समय में जनतंत्र की अंत्येष्टि इस प्रकार कभी न होती।’
उनका शरीर कांपने लगा और आंसू निकलने लगे। बोलीं, ‘सत्तामोह और पुत्रमोह में यह सब हो रहा है। जवाहर भाई के समय में जनतंत्र की अंत्येष्टि इस प्रकार कभी न होती।’