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पढ़ें नाबालिग के साथ दस साल तक हुए सामूहिक दुष्कर्म की दास्तां, 17 वर्ष की उम्र में बन गई मां
Sat, 15 Dec 2018 08:49 PM IST
MANISH sachan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: MANISH sachan
Updated Sat, 15 Dec 2018 08:49 PM IST
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कुछ लोगों के चंगुल में फंस कर दस सालों तक सामूहिक दुराचार का शिकार हुई एक युवती का मुकदमा दर्ज करने के बजाए बिजनौर पुलिस ने उसे दुत्कार कर भगा दिया। काफी मशक्कत के बाद यह युवती मेरठ में अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकी।
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इतने पर भी पुलिस ने फिलवक्त आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इस युवती की शिकायत पर दिल्ली महिला आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेज कर युवती को न्याय दिलाने के लिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराने व दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की सिफारिश की है।
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आयोग ने कहा है कि लगभग हर दूसरे दिन आयोग के पास उत्तर प्रदेश में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार से संबंधित मामला आता है। आयोग ने ऐसे मामलों के प्रति यूपी पुलिस के रवैये को शर्मनाक, संवेदनहीन व आश्चर्यचकित करने वाला कहा है।
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आयोग की अध्यक्ष स्वाती जयहिंद ने मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में बताया है कि इस युवती को 12 वर्ष की उम्र में उसके पिता ने एक 65 वर्षीय व्यक्ति को कुल 40 हजार रुपये में बेच दिया था। बिजनौर के चांदपुर इलाके में उसे बंधक बनाकर उसके 17 वर्ष का होने तक चार लोग उसके साथ लगातार सामूहिक दुराचार करते रहे।
इसके बाद उसे बिजनौर में किसी दूसरी जगह पर रखा गया जहां से उसने भागने की कोशिश की पर पकड़ ली गई। उसकी इस कोशिश पर उसके साथ फिर क्रूरता बरतते हुए लगातार सामूहिक दुराचार किया गया। उसे भागने से रोकने के लिए उसे स्टोर रूम में बंद रखा जाता था और रात में उसे नशीला पदार्थ खिला दिया जाता था। लगातार हुए दुराचार की वजह से 17 वर्ष की आयु में उसने बालिका को जन्म दिया। आरोपियों ने उसके साथ मारपीट तो की ही उसकी बालिका को भी सिगरेट से जलाया गया।
अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को बताया कि पीड़िता ने आयोग को जानकारी दी है कि उसने चांदपुर पुलिस स्टेशन में मामले की शिकायत की पर पुलिस ने उसे दुत्कार दिया। उसने वहां पांच बार शिकायती पत्र दिया पर पुलिस ने एक न सुनी। बमुश्किल वह मेरठ के लिसाड़ीगेट थाने में रिपोर्ट दर्ज करा सकी पर अभी तक पुलिस इस मामले में किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
आयोग ने कहा है कि यूपी पुलिस का यह रवैया शर्मनाक और संवेदनहीनता से भरा है। आयोग ने महिलाओं के उत्पीड़न को लेकर यूपी पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए उनसे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। आयोग ने सीएम से आरोपियों की गिरफ्तारी कराने के साथ ही दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है।