2000 साल पुरानी शादी के जश्न में शामिल होगा अवध
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कोरिया के राजा सुरो और रानी हो के विवाह के दो हजार वर्ष पूरे होने का जश्न कोरिया में मनाया जाएगा। इस अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में अवध की भी नुमाइंदगी होगी। इस जश्न में रानी हो के मायके का प्रतिनिधित्व करने के लिए संस्कृति विभाग का दल गुरुवार को कोरिया रवाना हुआ। दल पांच व छह नवंबर को वहां होने वाले समारोह में शिरकत करेगा।
राजकुमारी हो नाव के जरिये अयोध्या से लंबी यात्रा तय कर कोरिया पहुंची थीं और उनका वहां के राजा सुरो से विवाह हुआ था। कोरिया के इतिहास में यह पहला अंतरराष्ट्रीय विवाह था। अब कोरिया में इस विवाह के दो हजार वर्ष पूरे होने का जश्न शुरू हुआ है।
यह महोत्सव कोरिया के गिमहे और बुसान नगरों में मनाया जाएगा। इसमें रानी हो के अयोध्या से किमहे की राजधानी गया पहुंचने की पूरी कहानी बताई जाएगी और उसका प्रदर्शन होगा। इसमें करीब 1500 लोग हिस्सा लेंगे। कोरिया ने अयोध्या में रानी हो की स्मृति में स्मारक का निर्माण भी कराया है।
दल में संस्कृति सचिव हरिओम के अलावा अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह, अयोध्या के राजपरिवार के सदस्य तथा फैजाबाद व अयोध्या के अधिकारी तथा पर्यटन से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
सुरो और रानी हो की कहानी
कोरिया के करक राज्य किमहे की स्थापना का श्रेय राजा किम सुरो को दिया जाता है। अयोध्या में राजकुमारी के रूप में जन्म लेने वाली हो करीब तीन माह की जलयात्रा कर किमहे करक राज्य के समुद्र तट पहुंची थीं।
उनके साथ 20 और लोग थे। रानी उस समय 16 वर्ष की थीं। इतिहासकारों के अनुसार, नाव का नेतृत्व कर रही महिला ने अपना परिचय अयोध्या की राजकुमारी के रूप में दिया और अपना नाम हो बताया था।
उनका राजा सुरो से विवाह हुआ। सुरो और हो से 10 लड़के और दो लड़कियां हुईं, जो कोरिया की एक बड़ी आबादी के पूर्वज माने जाते हैं।