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अभिनवगुप्त और शारदापीठ पर शोध में आएगी तेजी
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लखनऊ। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 समाप्त होने पर देशभर में जश्न मनाया जा रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और अभिनवगुप्त शोध संस्थान के निदेशक पद्मश्री बृजेश शुक्ला इसको अलग नजर से देखते हैं। उनके अनुसार धारा-370 की समाप्ति के बाद अभिनव गुप्त और शारदापीठ पर शोध में आसानी होगी। कश्मीर के निवासी अभिनव गुप्त संस्कृत के साथ ही काव्यशास्त्र, नाट्यशास्त्र और तंत्रशास्त्र के प्रकांड विद्वान थे। वहीं शारदापीठ का नाम विद्वान स्थली के रूप में है। वहां जाने वाले को विद्वान माना जाता था।
प्रो. बृजेश शुक्ला ने बताया कि अभिनव गुप्त से लेकर आदि शंकराचार्य सभी शारदापीठ गये थे। संस्कृत के जितने बड़े विद्वान हुए सभी वहां जरूर गये। शारदापीठ के बारे में कश्मीर में कोई विशेष जानकारी नहीं मिल रही है। माना जा रहा है कि यह स्थान संभवत: पाक अधिकृत कश्मीर में हो। लखनऊ विश्वविद्यालय में अभिनगुप्त पर शोध संस्थान की स्थापना हुई है, लेकिन यह दुखद स्थिति है कि अभिनव गुप्त और शारदापीठ कश्मीर में होने के बावजूद उनके ऊपर वहां कोई शोध नहीं हो रहा है। धारा-370 लागू होने की वजह से इस दिशा में हम लोगों के हाथ बंधे हुए थे। अब इस दिशा में संस्कृत विद्वान शोध कर पाएंगे। जम्मू और श्रीनगर विवि में संस्कृत विभाग हैं, लेकिन अभिनवगुप्त पर जिस तरह का शोध होना चाहिए अभी उसकी कमी है।
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प्रो. बृजेश शुक्ला ने बताया कि अभिनव गुप्त से लेकर आदि शंकराचार्य सभी शारदापीठ गये थे। संस्कृत के जितने बड़े विद्वान हुए सभी वहां जरूर गये। शारदापीठ के बारे में कश्मीर में कोई विशेष जानकारी नहीं मिल रही है। माना जा रहा है कि यह स्थान संभवत: पाक अधिकृत कश्मीर में हो। लखनऊ विश्वविद्यालय में अभिनगुप्त पर शोध संस्थान की स्थापना हुई है, लेकिन यह दुखद स्थिति है कि अभिनव गुप्त और शारदापीठ कश्मीर में होने के बावजूद उनके ऊपर वहां कोई शोध नहीं हो रहा है। धारा-370 लागू होने की वजह से इस दिशा में हम लोगों के हाथ बंधे हुए थे। अब इस दिशा में संस्कृत विद्वान शोध कर पाएंगे। जम्मू और श्रीनगर विवि में संस्कृत विभाग हैं, लेकिन अभिनवगुप्त पर जिस तरह का शोध होना चाहिए अभी उसकी कमी है।
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