पढ़िए,दिल्ली के कानून मंत्री की फर्जी डिग्री की कहानी
दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी तो होनी ही थी,उनकी एलएलबी ही नहीं बीएससी की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। फर्जी डिग्री लेने का खेल सबसे पहले यहां साकेत महाविद्यालय से शुरू हुआ।
1988 में जिस बीएससी डिग्री के बल पर भागलपुर में एलएलबी में तोमर ने प्रवेश लिया,उसको इसी साल जनवरी माह में जांच के बाद अवध विवि ने फर्जी करार दिया था। जबकि भागलपुर विवि ने भी अप्रैल माह के आखिर में दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कानून मंत्री की एलएलबी डिग्री को भी फर्जी बता दी थी।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 के दौरान त्रिनगर विधानसभा सीट से आप पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उतरे जितेंद्र सिंह तोमर पुत्र बलबीर सिंह तोमर की स्नातक डिग्री फर्जी होने का आरोप लगा था।
यह डिग्री वर्ष 1988 में डा.राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध का.सु. साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय अयोध्या से जारी बताई गई थी। गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील क्षेत्र के रावली कलां निवासी प्रदीप पुत्र वेदप्रकाश ने डिग्री की जांच के लिए अवध विवि प्रशासन को पत्र लिखा। कुलपति के निर्देश पर परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी ने गोपनीय विभाग से जांच कराई थी।
जांच में जितेंद्र सिंह तोमर की बीएससी द्वितीय वर्ष, अनुक्रमांक-31331, वर्ष 1988 की उपाधि, अंकपत्र व अनुक्रमांक को पूर्णतया फर्जी पाया गया था। परीक्षा नियंत्रक ने इसी साल 22 जनवरी को पत्रांक-लो.अ.वि./उपाधि/02/2015 पर शिकायतकर्ता को पत्र भेज अवगत कराया था।
इसी स्नातक डिग्री के आधार पर कानून मंत्री ने बिहार के तिलकामांझी भागलपुर विवि से एलएलबी डिग्री भी हासिल की थी। जिस डिग्री को सोमवार को भागलपुर विवि ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर फर्जी करार दिया है।
मंत्री ही नहीं,इंजीनियर-प्राचार्य की भी डिग्री मिली फर्जी
डॉ.राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में क्या फर्जी डिग्री बनाने वालों का रैकेट सक्रिय है? अवध विवि से जारी कई नामचीन लोगों की डिग्रियां फर्जी साबित होने से यह सवाल उठना लाजिमी है।
दरअसल,दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ही पहले ऐसे शख्स नहीं हैं,जिनकी अवध विवि से जारी डिग्री फर्जी मिली हो।
इसके पहले भी यूपीएसआईडीसी के मुख्य अभियंता रहे अरुण कुमार मिश्र की बीटेक डिग्री व शहर के प्रतिष्ठित मनूचा कालेज की प्राचार्य रहीं डा शशि मिश्रा की परास्नातक डिग्री भी फर्जी मिल चुकी है।
इनके अलावा एक-दो मामले में अभी जांच लंबित है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ये मामले हाईकोर्ट तक भी पहुंचे,फिर भी विवि स्तर से रैकेट की तलाश नहीं कराई गई।अब कानून मंत्री की फर्जी डिग्री का मामला उछला है,तब भी जांच को लेकर विवि उदासीन बना है।
...मगर जांच को तैयार नहीं विवि
भले अवध विवि से जारी कई डिग्रियां अब तक फर्जी मिल चुकी हों और नामचीन लोगों के खिलाफ इस आरोप में कार्रवाई हो चुकी है,लेकिन इसके बाद भी फर्जी डिग्री बनाने वाले की तलाश कराना अवध विवि ने मुनासिब नहीं समझा है।
जबकि जांच हो जाए तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं और फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश भी हो सकता है। विवि परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी कहते हैं,फर्जी डिग्री साकेत कालेज की है। लिहाजा,जांच महाविद्यालय प्रशासन या फिर शासन को करानी चाहिए।अगर हमें कोई आदेश मिले तो जांच कराई जाएगी।