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13 साल की बेटी को करनी थी MSc, पिता ने बेचा खेत
लखनऊ/आशीष्ा त्रिवेदी
Updated Sat, 31 Aug 2013 07:34 PM IST
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मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले तेज बहादुर वर्मा ने अपनी साढ़े तेरह वर्षीय होनहार बिटिया को एमएससी माइक्रोबॉयोलॉजी में दाखिला दिलाने के लिए एक बीघा खेत बेच दिया।
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इसके बाद उन्होंने एलयू में एमएससी माइक्रोबॉयोलॉजी की 25075 रुपए सेमेस्टर फीस जमा कर दी है।
वह हॉस्टल में रखकर अपनी बिटिया को पढ़ाना चाहते हैं, क्योंकि उनके घर बरिगवां से एलयू कैंपस काफी दूर है।
जाहिर सी बात है कि इसके लिए उन्हें और धन की जरूरत है लेकिन आगे पूरी पढ़ाई का खर्च उठा पाना उनके बस की बात नहीं है।
फिलहाल इस होनहार छात्रा की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के एल्यूमनाई व मशहूर गीतकार जावेद अख्तर और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शिक्षक और समाजसेवी अभिषेक पाटिल तैयार हैं।
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फिलहाल अब वह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) में दाखिला नहीं लेगी। क्योंकि यहां एकेडमिक काउंसिल के निर्णय के बाद वह अपने पिता के साथ अधिकारियों से मिली थी।
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उसे कोई रिसपांस नहीं मिला। अब दोबारा बीबीएयू के दाखिले का ऑफर उसे स्वीकार नहीं है, क्योंकि वह एलयू में प्रवेश ले चुकी है।
सुषमा वर्मा के पिता तेज बहादुर वर्मा कहते हैं कि उन्हें सोमवार को एलयू के चीफ प्रॉक्टर प्रो. मनोज दीक्षित ने मिलने के लिए बुलाया है। वह कहते हैं कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनकी बिटिया एमएससी माइक्रोबॉयोलॉजी कोर्स में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर एलयू का नाम रोशन करेगी।
7 फरवरी सन् 2000 को जन्मी सुषमा वर्मा ने 7 वर्ष 3 महीने और 28 दिन में हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने वर्ष 2010 में सेंट मीराज इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट भी पास कर लिया।
इंटर पास करने के बाद सुषमा ने सिटी मांटेसरी गर्ल्स डिग्री कॉलेज से इस वर्ष 66 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी पास किया। इसके बाद सुषमा को बीबीएयू में एकेडमिक काउंसिल में एमएससी माइक्रोबॉयोलॉजी में दाखिले के लिए एक स्पेशल सीट बढ़ाने का फैसला हुआ।