फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   story behind chaotic ticket distribution in bjp

पढ़िए, भाजपा में विद्रोह के पीछे का सच

Fri, 21 Mar 2014 05:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 21 Mar 2014 05:47 PM IST
विज्ञापन
story behind chaotic ticket distribution in bjp

नेताओं के फैसलों ने भाजपा की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। पंजाब में गुब्बारा फटने से लगी आग भाजपा की परेशानी बन गई है तो उत्तर प्रदेश में सड़कों पर फट रहे कार्यकर्ताओं के गुबार की आंच ‘मिशन मोदी’ के पसीने छुड़ाती दिख रही है।

विज्ञापन


पार्टी की तरफ से विरोधी सेनाओं से मोर्चा लेने के लिए भाजपा के सेनापतियों को समर भूमि पर दिखना चाहिए लेकिन वे नेतृत्व के फैसले से क्षुब्ध और असहज होकर घर बैठ गए हैं।
विज्ञापन


इनका दर्द है कि टिकट देने या न देने का फैसला तो नेतृत्व का है लेकिन उन्हें इस तरह अपमानित क्यों किया गया? पहले बता देते तो वह चुनाव लड़ने की तैयारी ही क्यों करते?
विज्ञापन
विज्ञापन


इनकी पीड़ा कुछ इस तरह बाहर आती है, ‘आज हमारे व हमारे परिवार का भाजपा के मौजूदा नेतृत्व के लिए कोई महत्व ही नहीं रह गया है।’

सड़कों पर विद्रोह बयां कर रहा कहानी

story behind chaotic ticket distribution in bjp

टिकटों को लेकर सड़कों पर दिख रहा विद्रोह और राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बड़े पैमाने पर फूंके जा रहे पुतले भाजपा के भीतर की कहानी खुद-ब-खुद बयां कर देते हैं।

देवरिया से लेकर मुजफ्फरनगर तक नजर दौड़ाएं तो ऐसी कोई जगह नहीं दिखती जहां टिकटों को लेकर गुस्सा मुखर हो और राजनाथ सिंह पर निशाना न साधा जा रहा हो।

भले ही राजनाथ के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन व विद्रोह को कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से हवा दे रहे हों। लेकिन एक बात तो पूरी तरह साफ हो गई है कि प्रत्याशियों के बारे में प्रमुख नेताओं से बातचीत के दावे खोखले रहे हैं। टिकट देने में जीतने पर नहीं बल्कि एक-दूसरे को निपटाने पर ही ध्यान दिया गया।

टिकट देने में प्राथमिकता चुनाव भाजपा को जितवाना नहीं बल्कि चुनाव बाद उभरने वाली स्थिति में अपनी जीत के प्रबंध करना रहा है।

तो, क्या कह रहे थे अनंत कुमार?

story behind chaotic ticket distribution in bjp

पार्टी के एक प्रमुख नेता सवाल उठाते हैं कि राष्ट्रीय महासचिव अनंत कुमार ने उत्तर प्रदेश के उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए बार-बार 55 उम्मीदवारों की बात कही।

पर, सूची सिर्फ 53 की जारी की गई। जिन लोगों ने अनंत कुमार की बात ध्यान से सुनी होगी, उन्हें याद होगा कि कुमार ने केशरीनाथ त्रिपाठी को इलाहाबाद से उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया था।

पर, सूची से उनका नाम गायब था। जाहिर है कि संसदीय बोर्ड से सूची को मंजूरी मिलने के बाद कुछ लोगों ने उसमें से दो नाम रोके।

यही नहीं इनका यह भी तर्क है कि सूची में जो नाम घोषित किए गए, उनका ऐलान तो पहले भी किया जा सकता था। फिर सूची को लेकर इस तरह का माहौल क्यों बनाया गया कि एक-एक सीट पर गहन समीक्षा हो रही है।

यह बातें किस ओर कर रही इशारा

story behind chaotic ticket distribution in bjp

लालजी टंडन और डॉ. मुरली मनोहर जोशी पहले ही यह कह चुके हैं कि उनकी नाराजगी टिकटों पर नहीं बल्कि इस पर थी कि कम से कम उनसे बात तो करनी चाहिए थी।

इन लोगों ने सवाल उठाया था कि जो लोग पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, नेताओं की सहमति से फैसलों का दावा करते हैं, वे दो टूक बात क्यों नहीं करते कि किसे चुनाव लड़ना है और किसे नहीं?

यही दर्द अब अन्य लोगों के मुंह से बाहर आ रहा है। इनमें टिकट कटने से आहत देवरिया से दावेदार पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही हों या जौनपुर से दावेदारी करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद या फिर देवरिया से टिकट पाने वाले कलराज मिश्र।

यह सभी जो कुछ कहते हैं, उससे टिकटों का फैसला करने वाले कठघरे में खड़े हो जाते हैं।

इन बातों के पीछे कुछ न कुछ तो है

story behind chaotic ticket distribution in bjp

शाही कहते हैं कि उनके पिताजी कश्मीर आंदोलन में दो-दो बार जेल गए। वह खुद बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व जनसंघ की विचारधारा में पले व बढ़े।

मर्यादा से बंधे परिवार का सदस्य होने के नाते वह इसे तोड़ेंगे नहीं। पर, देवरिया का संकट टालने के लिए किसी नेता ने उनसे अभी तक बात नहीं की है।

चिन्मयानंद लगातार कह रहे हैं कि जौनपुर में केपी सिंह को प्रत्याशी बनाने पर उन्हें आश्चर्य है। देवरिया से टिकट पाने वाले कलराज मिश्र का कहना है कि उन्होंने तो नेतृत्व से कई बार आग्रह किया कि देवरिया से वहीं के किसी नेता को चुनाव लड़ाया जाए।

पर, राष्ट्रीय नेतृत्व ने निर्देश दिया कि देवरिया से लड़ना है। इसका मतलब साफ है कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेताओं से बातचीत करने की जरूरत तक नहीं समझी गई। नतीजा सामने है।

राजनाथ से लेकर कल्याण तक निशाने पर

story behind chaotic ticket distribution in bjp

यह पहला मौका होगा जब कल्याण सिंह भी भाजपा के टिकटों को लेकर विवाद में घिरे हैं। पहली बार पार्टी नेताओं पर टिकट बेचने और दूसरे दलों से मिलकर पार्टी का भट्ठा बैठाने के आरोप लग रह हैं।

नेताओं पर टिकट दिलाने में खेल करने का आरोप सामने आ रहे हैं। कल्याण के खिलाफ सबसे ज्यादा गुस्सा उनके अपने गृह जिला अलीगढ़ में ही देखने को मिल रहा है।

आरोप लग रहा है कि भाजपा को हराने के लिए वहां खेल किया गया। बसपा से साठगांठ कर एक पूर्व मंत्री के पुत्र की मदद के लिए सतीश गौतम को टिकट दिलाया गया है।

फर्रुखाबाद के टिकट को लेकर भी कल्याण निशाने पर हैं। यहां भी उन पर अपने स्वार्थ में कमजोर प्रत्याशी उतारने का आरोप लग रहा है।

इस खेल में राजनाथ का हाथ!

story behind chaotic ticket distribution in bjp

उन्नाव में साक्षी महराज की उम्मीदवारी को लेकर भी कल्याण निशाने पर पर हैं। आरोप है कि भाजपा का बंटाधार करने वाले साक्षी को कल्याण ने पार्टी के एक दिवंगत नेता के परिवार को नीचा दिखाने के लिए टिकट दिलाया है। इसमें राजनाथ सिंह का भी हाथ है।

रायबरेली, देवरिया, श्रावस्ती, अयोध्या, उन्नाव, सीतापुर, जौनपुर, मुजफ्फरनगर सहित कई अन्य स्थानों को लेकर राजनाथ सिंह निशाने पर हैं।

आरोप लग रहे हैं कि जानबूझकर ऐसे लोगों को मैदान में उतारा गया कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने की राह आसान न रहे। सभी जगह एक ही बात कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले सभी को टिकट दिलाने का आश्वासन दिया।

फिर उन्होंने अपने समीकरणों में फिट बैठने वालों को मैदान में उतार दिया। सवाल उठाए जा रहे हैं कि जो लोकसभा व विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं उनको मैदान में उतारने के पीछे पार्टी की क्या रणनीति है?

चलने लगे हैं बगावती एसएमएस

story behind chaotic ticket distribution in bjp

कल्याण के घर अलीगढ़ का हाल दिलचस्प है। यहां एक एसएमएस चल रहा है जो पार्टी का पूरा हाल बता देता है।

एसएमएस इस प्रकार है, ‘चाय वाले ने दूधिए को टिकट थमाई है, अब पता चला नमो टी स्टॉल पर मिलावटी दूध की चाय पिलाई है, कर दिया सब गुड़-गोबर। ऐसा वो कलुवा हलवाई है, धूल चटा देंगे 10 अप्रैल को हमने भी ये कसम उठाई है।’

यहां की रार थामने के लिए संघ परिवार ने राजेश भारद्वाज और प्रत्याशी सतीश गौतम के साथ करीब दो घंटे तक वार्ता की लेकिन नतीजा नहीं निकला।

भाजपा के फैसलों पर आपत्ति उठाने वाले पार्टी के नेता राजेश भारद्वाज खुलकर मैदान में आ गए हैं। उनका कहना है कि डमी प्रत्याशी उतारा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed