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कुछ तो अपग्रेड करो ब्रदर!
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Wed, 04 Dec 2013 10:10 AM IST
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सचिव स्तर के एक अधिकारी हैं। उन्होंने कलेक्टर रहते हुए एक जिले में लोगों को ऑनलाइन सुविधाएं देने के लिहाज से एक अहम प्रयोग किया था।
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पूरे देश में उस प्रयोग से नाम कमाया। अब वह शासन में अहम पोजीशन पर हैं। उनके साथी बताते हैं कि ब्रदर के साथ दिक्कत ये है कि वे जिले की मानसिकता से ऊपर ही नहीं उठ पा रहे हैं।
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प्रदेश मुख्यालय में जिस बात की मॉनिटरिंग के लिए पूरा सिस्टम बना हुआ है, वे उसकी मॉनिटरिंग के लिए पूरा पसीना निकाले डाल रहे हैं।
उनको लग रहा है कि इससे सरकार खुश हो जाएगी और उनकी रेटिंग बढ़ जाएगी। इसके लिए एक प्राइवेट एजेंसी तलाशी जा रही है।
नतीजा ये है कि मॉनिटरिंग वाले विभाग के साहब ने इस योजना की मॉनिटरिंग से ध्यान ही हटा लिया।
वह अक्सर चर्चा करते सुनाई देते हैं कि जब शासन की नजर एक ही काम पर अड़ी है तो फिर उस ओर दूसरा भी क्यों ध्यान लगाए? वह इसे देख ही रहे हैं, हम कुछ दूसरा अच्छे से देखेंगे।
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