{"_id":"f85fddcdf7c1113bcee7ef4f48d05395","slug":"story-about-a-up-politician","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंत्री जी का चाय खर्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंत्री जी का चाय खर्च
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 29 Jul 2013 02:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश में थोक के भाव में राज्य मंत्री बनाए गए हैं। जातीय संतुलन साधने के लिए कई लोगों को लालबत्ती दे दी गई।
राज्य मंत्रियों को विभाग तो दे दिया गया है पर काम उनके पास नहीं है। बहुत कम कैबिनेट मंत्री हैं जिन्होंने अपने राज्य मंत्रियों को काम दिए हैं। पर क्षेत्र की जनता को इससे क्या लेना-देना।
वह तो यह जानती है कि उनका विधायक मंत्री है। सो छोटे-मोटे काम के लिए क्षेत्र की जनता चल देती है, उनसे मिलने। ग्रामीण क्षेत्रों के कामकाज से जुड़े एक राज्य मंत्री ऐसे हैं जो क्षेत्र की जनता को लेकर काफी परेशान हैं।
उनकी परेशानी उनके लिए पैरवी करने को लेकर नहीं है। उनकी परेशानी है चाय-पानी का खर्च। वजह जब उनके पास काम नहीं है तो विभाग के अफसर भी घास नहीं डालते हैं।
विज्ञापन
इसलिए वह कहां तक अपने पैसे से इन लोगों को चाय-पानी कराएं। ऐसी लाल बत्ती किस काम की कि माल आने के बजाय खुद टेंट ढ़ीली करनी पड़े।
विज्ञापन
राज्य मंत्रियों को विभाग तो दे दिया गया है पर काम उनके पास नहीं है। बहुत कम कैबिनेट मंत्री हैं जिन्होंने अपने राज्य मंत्रियों को काम दिए हैं। पर क्षेत्र की जनता को इससे क्या लेना-देना।
वह तो यह जानती है कि उनका विधायक मंत्री है। सो छोटे-मोटे काम के लिए क्षेत्र की जनता चल देती है, उनसे मिलने। ग्रामीण क्षेत्रों के कामकाज से जुड़े एक राज्य मंत्री ऐसे हैं जो क्षेत्र की जनता को लेकर काफी परेशान हैं।
विज्ञापन
उनकी परेशानी उनके लिए पैरवी करने को लेकर नहीं है। उनकी परेशानी है चाय-पानी का खर्च। वजह जब उनके पास काम नहीं है तो विभाग के अफसर भी घास नहीं डालते हैं।
विज्ञापन
इसलिए वह कहां तक अपने पैसे से इन लोगों को चाय-पानी कराएं। ऐसी लाल बत्ती किस काम की कि माल आने के बजाय खुद टेंट ढ़ीली करनी पड़े।