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कहीं तेजी न पड़ जाए भारी
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 08 Oct 2013 09:23 AM IST
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लोगों को छत मुहैया कराने वाले महकमे में आजकल दो अफसरों में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है।
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दोनों ही पहुंच वाले हैं। एक को मुख्यमंत्री पसंद करते हैं तो दूसरे को बड़े नेता। इसलिए बड़े नेता के करीबी अफसर इतराते घूम रहे हैं। वह हर काम में दखल देते हैं।
लोहिया समग्र विकास योजना के तहत जनप्रतिनिधियों ने काम कराने के प्रस्ताव भेजे थे। इसमें सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं।
बड़े नेता के करीबी अफसर ने प्रस्तावों पर इतनी आपत्तियां लगा दीं कि काम रुक गया। बात मुख्यमंत्री तक पहुंची।
छानबीन के दौरान पता चला कि यह साहब तो बिना बात अड़ंगेबाजी करते रहते हैं।
इससे इन साहबान का मामला कुछ बिगड़ता दिख रहा है। विभाग में यह चर्चा जोरों पर है कि साहब की तेजी कहीं भारी न पड़ जाए।