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यूपी: एक ही पैन कार्ड पर काम कर रहे ढाई हजार शिक्षक, एसटीएफ करेगी जांच

Wed, 01 Jul 2020 09:07 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 01 Jul 2020 09:07 AM IST
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STF will investigate 2.5 thousand teachers working with the same PAN card number
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एक ही पैन नंबर पर काम कर रहे ढाई हजार से अधिक शिक्षकों की जांच शासन ने एसटीएफ को सौंपी दी है। परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर अपलोड कराने के बाद अब तक ढाई हजार ऐसे शिक्षक सामने आएं हैं, जिन्होंने पैन नंबर बदला है। 
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वहीं सौ से अधिक ऐसे मामले भी सामने आएं हैं, जिनमें दो शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। बेसिक शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के लिए गृह विभाग को पत्र लिखा था। गृह विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसटीएफ को जांच सौंपी है।
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बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने पिछले वर्ष विभाग में मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप को लागू किया था। उन्होंने परिषदीय स्कूल में कार्यरत हर शिक्षक को अपना डाटा प्रेरणा एप और मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। 
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पहले 30 जून तक पोर्टल पर डाटा अपलोड कर उसका सत्यापन करना था, इसकी अवधि 15 जुलाई तक बढ़ाई है। मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर डाटा अपलोड कराने के दौरान सामने आया कि 2008 से 2019 के बीच करीब ढाई हजार शिक्षकों ने अपना पैन नंबर बदला है। 

उन्होंने नियुक्ति के समय जो पैन नंबर दिया था वह उसी नाम के किसी अन्य शिक्षक के नाम पर दर्ज था। विभाग के सूत्रों के मुताबिक मानव संपदा पोर्टल पर 15 जुलाई तक डाटा सत्यापन होने के बाद ऐसे और भी कई मामले सामने आने की उम्मीद है। 

इनकी संख्या चार से पांच हजार तक पहुंच सकती है। विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने खुद प्रतिदिन जांच की समीक्षा कर रही हैं। उन्होंने सोमवार को कानपुर मंडल और आगरा मंडल की समीक्षा की। मंगलवार को मिर्जापुर मंडल सहित कुल 11 जिलों की समीक्षा की।

हर बार होती थी फर्जी शिक्षकों की भर्ती
पहले परिषदीय स्कूलों में दसवीं, 12वीं, स्नातक, बीटीसी, बीएड या अन्य कोर्स के प्राप्तांक से तैयार मैरिट के आधार पर शिक्षक भर्ती होती थी। ऐसे में स्कूलों में फर्जी शिक्षकों को भर्ती कराने वाला गिरोह विभाग में पहले से कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेज और प्रमाण पत्रों को जुटाकर उन्हीं के आधार पर कार्यरत शिक्षक के नाम से फर्जी शिक्षक नियुक्त कराते थे। 
उसमें केवल फोटो ही फर्जी शिक्षक की लगती थी, जबकि अंक तालिकाएं, प्रमाण पत्र, डिग्री, पैन कार्ड नंबर पहले से कार्यरत शिक्षक का ही होता था। अधिकारियों का कहना है कि 1995 से लेकर 2010 तक हुई लगभग सभी सहायक अध्यापकों की भर्ती में ऐसे अनेक मामले सामने आएंगे।
 

दो शिक्षकों का एक बैंक खाता

बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही पड़ताल में सामने आया है कि दो शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। दोनों शिक्षक या तो एक ही जिले में कार्यरत हैं या किसी अन्य जिले में लेकिन वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा है। विभाग का मानना है कि दोनों में से एक शिक्षक निश्चित तौर पर फर्जी हैं, लेकिन वह वास्तविक शिक्षक की मिलीभगत से इस कारनामे को अंजाम दे रहे हैं।
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