एएमयू में एससी व एसटी को आरक्षण न देने पर मामला गर्माया, आयोग ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
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राज्य अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आरक्षण के नियमों का अनुपालन न करने को लेकर अप्रसन्नता जताई है। आयोग ने कहा है कि विश्वविद्यालय आरक्षण के संबंध में अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करने में असफल रहा है। आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने कहा, विश्वविद्यालय को आठ अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। ऐसा न होने पर बाध्य होकर हमें कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।
इंदिरा भवन स्थित आयोग कार्यालय में बुधवार को पत्रकार वार्ता में बृजलाल ने कहा, अगर कोई यह समझ रहा है कि यह विश्वविद्यालय सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए है, इसकी स्थापना मुस्लिम समुदाय द्वारा की गई या इसका संचालन मुस्लिम समुदाय करता है तो यह गलत है। देश के राष्ट्रपति एएमयू के विजिटर भी हैं।
उन्होंने बताया कि 1990 में एएमयू द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों में मुस्लिमों को 50 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए एएमयू कोर्ट ने 1989 में एक प्रस्ताव बनाकर राष्ट्रपति के पास उनकी स्वीकृति के लिए भेजा था। राष्ट्रपति ने इस प्रस्ताव पर जवाब दिया कि विश्वविद्यालय में मुस्लिम आरक्षण असंवैधानिक है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक मामले में यह व्यवस्था दी है कि यह विश्वविद्यालय न ही मुस्लिम समुदाय द्वारा बनाया गया या संचालित किया गया।
अध्यक्ष ने कहा, इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए एक फाउंडेशन कमेटी बनाई गई थी। इसके प्रयास पर महाराजा विजयनगरम, ठाकुर गुरु प्रसाद सिंह, कुंवर जगजीत सिंह (बिजनौर), राजा हरिकिशन सिंह, महाराजा दरभंगा, रायशंकर दास (मुजफ्फरनगर), महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह और अन्य नामचीन लोगों ने धन व जमीन देकर इसकी स्थापना कराई। एएमयू को बीएचयू की तरह ही संविधान की सातवीं अनुसूची में संघीय सूची में रखा गया है। इसका अर्थ है कि इन दोनों ही विश्वविद्यालयों पर संघीय कानून लागू होगा। इसके बाद भी एएमयू ने अपने गठन से लेकर अब तक अनुसचित जाति व जनजाति के छात्रों को प्रवेश में कोई आरक्षण नहीं दिया।
आयोग ने मांगा जवाब, किन हालात में ऐसा किया गया
अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने एएमयू के कुलसचिव को बुधवार को नोटिस जारी कर कहा है कि वे बताएं कि ऐसा किन हालात में हुआ क्योंकि अभी तक सर्वोच्च न्यायालय ने भी ऐसा कोई फैसला नहीं दिया है जिसमें अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को एएमयू में आरक्षण देने से मना किया गया हो।
राजनीति से प्रेरित नहीं है कदम
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जवाब मांगना कहीं राजनीति से प्रेरित तो नहीं है? इस सवाल पर बृजलाल ने कहा, ऐसा नहीं है। यह कदम एक व्यवस्था के तहत उठाया गया है। मौजूदा शासनकाल से इसे जोड़कर न देखा जाए बल्कि यह पूछा जाए कि पूर्व में सत्ता में रहे दलों ने इस बाबत क्या किया?
अल्पसंख्यक विवि का दर्जा नहीं
बृजलाल ने एएमयू के कुलसचिव को जो नोटिस जारी किया है, उसमें इस बात को प्रमुखता के साथ लिखा गया है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को कभी भी अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल नहीं हुआ।