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विश्वविद्यालय में गलत नियुक्ति की जांच का अधिकार राज्य सरकार को नहीं : हाईकोर्ट
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लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिमल जायसवाल को राहत देते हुए उनकी गलत नियुक्त के मामले में राज्य सरकार को जांच करने से रोक दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार को विश्वविद्यालय की नियुक्ति में धांधली की जांच का अधिकार नहीं है।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने एलयू के प्रोफेसर बिमल जायसवाल की याचिका पर सोमवार को यह आदेश सुनाया। याचिका में कहा गया कि प्रोफेसर बिमल कुमार की नियुक्ति के खिलाफ सरकार ने आठ जनवरी 2025 को चार सदस्यीय जांच समिति बना कर जांच के आदेश दिए। समिति को 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। याची के अधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार को विश्वविद्यालय के मामले में जांच के अधिकार नहीं है।
याचिका का विरोध करते हुए सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याची की नियुक्ति नान क्रीमी लेयर में की गई थी जबकि उनके पिता भी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत थे। एक प्रोफेसर के बेटे की नियुक्ति नान क्रीमी लेयर में करना गलत है। अदालत ने मामले की जांच को सक्षम अधिकारी से कराने की अनुमति दी है।
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न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने एलयू के प्रोफेसर बिमल जायसवाल की याचिका पर सोमवार को यह आदेश सुनाया। याचिका में कहा गया कि प्रोफेसर बिमल कुमार की नियुक्ति के खिलाफ सरकार ने आठ जनवरी 2025 को चार सदस्यीय जांच समिति बना कर जांच के आदेश दिए। समिति को 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। याची के अधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार को विश्वविद्यालय के मामले में जांच के अधिकार नहीं है।
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याचिका का विरोध करते हुए सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याची की नियुक्ति नान क्रीमी लेयर में की गई थी जबकि उनके पिता भी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत थे। एक प्रोफेसर के बेटे की नियुक्ति नान क्रीमी लेयर में करना गलत है। अदालत ने मामले की जांच को सक्षम अधिकारी से कराने की अनुमति दी है।
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