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State Consumer Commission: राज्य उपभोक्ता आयोग ने आम्रपाली लॉ रेजिडेंसियल पर लगाया 43 लाख का जुर्माना
Tue, 13 Sep 2022 10:11 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 13 Sep 2022 10:11 PM IST
सार
समय से फ्लैट न दिए जाने के मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने लॉ रेजिडेंसियल पर 43 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Istock
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विस्तार
निर्धारित समय पर फ्लैट न देने के एक जैसे दो अलग अलग मामलों में राज्य उपभोक्ता आयोग ने लॉ रेजीडेंसियल डेवलेपर्स प्रा. लि. ग्रेटर नोएडा पर 43 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आठ सप्ताह के भीतर इस रकम को अदा न करने पर 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करना होगा।
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परिवादी गौरव भटनागर ने लॉ रेजीडेंसियल डेवलेपर्स प्रा.लि0. ग्रेटर नोएडा के विरुद्ध एक परिवाद प्रस्तुत किया। कहा गया कि डेवलेपर ने एक योजना आम्रपाली ला. रेजीडेंसियल के नाम से निकाली, जिसमें परिवादी ने एक 3 बीएचके फ्लैट कुल मूल्य 30,27,500 रुपये में बुक कराया। कंपनी ने तीन मार्च 2011 को फ्लैट का बायर एग्रीमेंट किया। कंपनी ने यह फ्लैट दिनांक एक मार्च 2014 तक देने का वायदा किया था पर समय से फ्लैट नहीं दिया गया। परिवादी ने बार-बार इस बाबत कंपनी को पत्र लिखा पर कोई हल नहीं निकला जबकि उसने आवश्यक धनराशि कर जमा दी थी। इस तरह के प्रकरणों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय में कहा है कि जहां पर कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होती है वहां पर योजना को 03 वर्ष में पूरा करना होता है।
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यह परिवार राज्य उपभोक्ता आयोग पीठासीन सदस्य राजेंद्र सिंह एवं विकास सक्सेना की पीठ के समक्ष प्रस्तुत हुआ। राजेंद्र सिंह के मुताबिक पीठ ने यह पाया कि इस मामले में इस कंपनी के चेयरमैन संजीव कुमार तथा डायरेक्टर पंकज जैन दोषी हैं। आयोग ने निर्णय सुनाया कि विपक्षीगण फ्लैट पर 08 सप्ताह के भीतर कब्जा दें अन्यथा उन्हें विलंब के लिए प्रतिमाह एक लाख रुपये अदा करना होगा। इसके अतिरिक्त परिवादी द्वारा इस मद में जमा की गई धनराशि उनके जमा करने के दिनांक से 10 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ अदा की जाएगी।
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कोर्ट के अनुसार, विपक्षीगण इसके अतिरिक्त दिनांक 02 सितंबर 2014 से फ्लैट का कब्जा देने की तारीख तक तक प्रति माह 15,000 रुपये क्षतिपूर्ति मय 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 1,50,000 रुपये हर्जाने के रूप में अदा करेंगे। परिवादी को हुई मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न, अवसाद व क्लेश के मद में निर्णय के 08 सप्ताह के भीतर 20 लाख रुपये भी विपक्षीगण अदा करेंगे। यदि यह समस्त धनराशि 08 सप्ताह के अंदर अदा नहीं की गई तो ब्याज की दर 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से होगी। ठीक इसी तरह का दूसरा प्रकरण भी इसी पीठ के समक्ष पेश हुआ जिसमें परिवादी सचिन भटनागर ने इसी योजना में फ्लैट बुक कराया था। उनका फ्लैट भी समय से नहीं दिया गया। पीठ ने इस प्रकरण में भी पहले प्रकरण की तरह ही निर्णय सुनाया। विपक्षी को बीस लाख रुपये व अन्य हर्जाना देना होगा।