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किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाएगी राज्य जैव ऊर्जा नीति

Thu, 08 Oct 2020 10:04 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 08 Oct 2020 10:04 PM IST
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State bio-energy policy will increase additional income of farmers
thermal power plant
प्रदेश सरकार बायोमास आधारित कम क्षमता के ग्रेड इंटरएक्टिव पावर प्लांट की स्थापना पर विचार कर रही है। इसी तरह बिजली उत्पादन संयंत्रों के आसपास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के सहयोग से बायोकोल इकाइयों की स्थापना को भी हरी झंडी देने की तैयारी है। यह महत्वपूर्ण व्यवस्था राज्य जैव ऊर्जा नीति-2020 में शामिल करने का प्रस्ताव है। इस पर चर्चा के बाद इसे जल्द कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की योजना है। 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जुलाई-2020 में जैव ऊर्जा से संबंधित नीति तैयार करने का निर्देश दिया था। नियोजन विभाग के राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड ने इस नीति का मसौदा तैयार किया है। विभिन्न विभागों में चर्चा के बाद कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। ऊर्जा विभाग ने बायोमास आधारित कम क्षमता के ग्रिड इंटरएक्टिव पावर प्लांट की स्थापना का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। ऐसे प्लांट पंजाब और हरियाणा में हैं।
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इसी तरह राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने कार्बन उत्सर्जन घटाए जाने के लिए उसके सीएसआर मद से उत्पादन संयंत्रों के निकटवर्ती क्षेत्रों में कार्यरत फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के समन्वय से बायोकोल (पेलेट्स व ब्रिकेट्स) उत्पादन संयंत्रों की स्थापना प्रस्ताव दिया है। इससे किसानों को आय बढ़ाने का अतिरिक्त अवसर भी मिलेगा।
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अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग से राज्य जैव ऊर्जा नीति को अंतिम रूप दिलाने की तैयारी है। इस नीति के तहत इकाइयों की स्थापना पर तमाम तरह के प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं। विभागों की राय लेकर इसे जल्दी ही अंतिम रूप देने की योजना है।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम का बदायूं में बायोफ्यूल प्लांट लगाने का प्रस्ताव
हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने बदायूं में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया गया। कंपनी वहां इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही कर रही है। कंपनी ने किसानों से अधिकतम 1250 रुपये प्रति टन की दर से किसानों से धान की पराली खरीदने का भी प्रस्ताव किया है। कंपनी ने बायो सीएनजी इकाई के लिए बायोमास के रूप में स्वीट सरगम का भी विकल्प सुझाया है।

पूर्वांचल में पुआल औसतन 2000 रुपये प्रति टन उपलब्ध
गोरखपुर मंडल के फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के निदेशकों ने बताया कि पूर्वांचल में धान का पुआल औसतन 2000 रुपये प्रति टन उपलब्ध होता है। किसान इसे जानवरों को खिलाने और केले की खेती में मल्चिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं। गोरखपुर मंडल में धान के पुआल की कटाई के बाद खेत में जलाने की कोई घटना नहीं हो रही है। शासन ने फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों को एक प्रस्ताव तैयार कर उपलब्ध कराने को कहा है।

इस प्रस्ताव पर विचार कर नीति का हिस्सा बनाया जा सकता है। इस नीति से किसानों से कच्चे माल के रूप में पराली, गन्ने की पत्तियां व खोई, केले के तने, पत्तियों के साथ गोबर व अन्य बायोमास की खरीद की जा सकेगी। इससे किसानों की अतिरिक्त आय हो सकेगी।


निष्प्रयोज्य खाद्य तेल का बॉयोडीजल बनाने में उपयोग संभव
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि दो बार उपयोग करने के बाद खाद्य तेल की प्रकृति खाने लायक नहीं रह जाती है। एफएसएसएआई ने हाल में इस प्रकार के तेल से बायोडीजल बनाने की सहमति दी है। नीति में इसे शामिल किया जा सकता है।
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