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युवाओं के लिए बेहद खास है ‘स्टार्ट-अप’ पॉलिसी-2016

Sun, 24 Jan 2016 03:42 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 24 Jan 2016 03:42 PM IST
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Start up policy for Uttar Pradesh.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी आईटी एंड ‘स्टार्ट-अप’ पॉलिसी-2016 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। इसमें अनोखे बिजनेस आइडिया के साथ प्रदेश में खुद का काम शुरू करने वाले युवाओं की मदद के प्रावधान हैं।

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प्रदेश सरकार ने स्टार्ट-अप के प्रोत्साहन के लिए 100 करोड़ रुपये से ‘सीड फंड’ की स्थापना के साथ एंटरप्रिन्योर्स के लिए कई खास सहूलियतों का प्रस्ताव किया है। पॉलिसी को आमजन से सुझाव के लिए जारी कर दिया गया है।
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प्रदेश की स्टार्ट अप पॉलिसी को इन्फ्यूज मॉडल (इन्क्यूबेटर्स-फंड ऑफ फंड्स- स्टार्ट-अप एंटरप्रिन्योर्स) पर तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत इन्क्यूबेटर्स, स्टार्ट-अप्स की मदद के लिए सरकार एक सेबी की निगरानी में वेंचर कैपिटल फंड बनाएगी। इससे स्टार्ट-अप कंपनियों के लिए डायरेक्ट फंड निवेश करने की जरूरत नहीं होगी। निवेशक सेबी से अप्रूव्ड वेंचर कैपिटल फंड के जरिये इसमें भागीदारी कर सकेंगे।
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प्रदेश सरकार इसमें 25 फीसदी हिस्से का योगदान करेगी। यह फंड स्टार्ट-अप कंपनियों को होने वाले फायदे से इक्विटी या डेब्ट के जरिये कार्पस फंड में वापस हो जाएगा। राज्य सरकार इस फंड के प्रबंधन के लिए एक स्थायी फंड मैनेजर को नामित या नियुक्त करेगी।

राजस्‍थान पॉलिसी की छाप

Start up policy for Uttar Pradesh.

इस पॉलिसी में राजस्थान की स्टार्ट-अप पॉलिसी की छाप साफ नजर आती है। इसमें केंद्र व राज्य सरकार की आईटी पॉलिसी की तमाम सुविधाएं देने के साथ ही इसे दूसरे राज्यों से बेहतर बनाने के लिए भी कई प्रस्ताव किए हैं।

स्टार्ट-अप के लिए चयनित इन्क्यूबेटर को पांच वर्ष तक हर साल पांच लाख रुपये की सहायता देने का प्रस्ताव किया गया है। इससे वह अपने शुरुआती खर्च और नुकसान के बीच आगे बढ़ सकेगा।

इन्क्यूबेटर को प्रतिष्ठित शिक्षण व औद्योगिक संस्थान से एक-एक व्यक्ति को न्यूनतम दो लाख रुपये प्रतिवर्ष के मानदेय पर रखना होगा, जो उसके मेंटर का काम करेगा।

प्रस्ताव में खास

- पहले चरण में सरकारी व अर्धसरकारी संस्थाओं से जुड़े तकनीकी, मैनेजमेंट, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम में नए स्टार्ट-अप की मदद के लिए इन्क्यूबेटर्स और एक्सीलरेटर्स की स्थापना की जाएगी।

- इन संस्थानों को कुल पूंजी का 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह अधिकतम 25 लाख रुपये तक होगा। राजस्थान में यह सीमा 10 लाख रुपये है।

ये भी होंगी खास बातें

Start up policy for Uttar Pradesh.

- 25 लाख रुपये मौजूदा इन्क्यूबेटर्स को मजबूती देने और विस्तार के लिए भी दिए जा सकेंगे। यह दो साल तक इन सुविधाओं के पूर्ण उपयोग की शर्त पर होगा।

- जिनके पास कोई बिजनेस आइडिया होगा, वे इसके लिए नोडल एजेंसी के पास आवेदन कर सकेंगे। आवेदन मंजूर होने पर उन्हें एक साल तक 15 हजार रुपये प्रतिमाह भत्ता मिलेगा।

- पायलट स्टेज पर स्टार्ट-अप को न्यूनतम 25 प्रतिशत (अधिकतम 10 लाख रुपये) का फंड उपलब्ध कराया जा सकेगा।

- सरकार ने फंड कारपस मैनेजमेंट कमेटी भी बनाने का फैसला किया है। यह कमेटी आईटी डिपार्टमेंट गठित करेगा।

- पॉलिसी में सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा का एलान किया गया है। इस व्यवस्था की निगरानी प्रमुख सचिव आईटी के हाथों में होगी।

- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एम्पावर्ड कमेटी गठित होगी। इसमें तमाम विभागों के प्रमुख सचिव होंगे।

इन क्षेत्रों में स्टार्ट-अप को मिलेगी तवज्जो

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- मोबाइल एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ई-कॉमर्स

- इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन, वीएलएसआई डिजाइन
- किसी भी तरह के अनोखे आइडिया और तकनीक

मामले पर आईटी प्रमुख सचिव आरके तिवारी का कहना हे कि स्टार्ट-अप पॉलिसी के ड्राफ्ट को मुख्यमंत्री की मंजूरी मिल गई है। इसे आम लोगों के सुझाव के लिए यूपीएलसी की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। उचित सुझावों को प्रस्तावित नीति में शामिल किया जाएगा। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा।

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