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Lucknow News: लिपाग्लिन की नकली दवा का कारोबार उजागर, दो पर प्राथमिकी

Sun, 27 Sep 2026 02:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 02:24 AM IST
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Spurious Lipaglyn drug racket exposed; FIR against two.
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। डायबिटीज, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और फैटी लिवर जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा लिपाग्लिन के नकली कारोबार का खुलासा हुआ है। बैच नंबर आईबी00327ए की 9,610 स्ट्रिप गुजरात की दो फर्मों को बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। दस्तावेज में इन दवाओं की खरीद लखनऊ की मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स से 11,360 स्ट्रिप दर्शाई गई, जबकि जांच में बालाजी फार्मास्युटिकल्स का औषधि लाइसेंस और जीएसटी पंजीकरण पहले ही निरस्त मिला। मामले में एफएसडीए ने सर्वेश सिंह उर्फ मुन्ना भाई और राजस्थान की फर्म मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस के संचालक दुर्गेश कुमार के खिलाफ अमीनाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश कुमार ने बताया कि मामला केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, नार्थ जोन, गाजियाबाद और राजस्थान के औषधि नियंत्रण अधिकारियों की संयुक्त जांच में सामने आया। जांच टीम ने क्योरहेल्थ मेडिकोस के लाइसेंस प्राप्त परिसर की पड़ताल की तो वहां दवाओं का कोई भंडारण नहीं मिला। परिसर किसी दूसरे व्यवसाय के लिए किराये पर दिया गया था।
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जांच में लखनऊ की बालाजी फार्मास्युटिकल्स भी संदेह के घेरे में आई। फर्म का लाइसेंस और जीएसटी पंजीकरण निरस्त मिला। फर्म के पूर्व संचालक ने लिपाग्लिन की बिक्री से इन्कार किया। इसके बावजूद अभिलेखों में क्योरहेल्थ मेडिकोस के जरिये इसी फर्म से 11,360 स्ट्रिप खरीदना दर्शाया गया था।
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क्योरहेल्थ मेडिकोस के संचालक दुर्गेश कुमार ने वीडियो कॉल के दौरान जांच अधिकारियों को बताया कि उसे दवाओं की आपूर्ति ‘मुन्ना भाई’ के माध्यम से हुई थी। जांच में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों का संबंध सर्वेश सिंह समेत अन्य लोगों से सामने आया। इससे फर्जी अभिलेख और बिलिंग के जरिए दवाओं की आपूर्ति की आशंका को बल मिला।

ब्रजेश कुमार के मुताबिक, इसी बैच की नकली लिपाग्लिन के मामले में महाराष्ट्र के ठाणे में भी सर्वेश उर्फ मुन्ना सिंह समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। औषधि विभाग के अनुसार निरस्त लाइसेंस वाली फर्म के नाम का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी बिल और अभिलेख तैयार किए गए और नकली दवाओं का अवैध क्रय-विक्रय किया गया।
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