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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Special on World Tourism Day: If you have not seen Awadh then what have you seen? Come once, you will be mesme

विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष: अवध नहीं देखा तो क्या देखा, एक बार आइए तो सही, मंत्रमुग्ध होकर जाएंगे

Fri, 27 Sep 2024 06:09 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 27 Sep 2024 06:09 AM IST
सार

World Tourism Day: आज विश्व पर्यटन दिवस है। चलिए आपको अवध घुमाते हैं। यहां धार्मिक से लेकर रोमांच तक की दुनिया है। यहां के हर जिले में कुछ न कुछ ऐसा है जो आपका मन मोहने के लिए काफी है। 

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कतर्नियाघाट एक अच्छा विकल्प। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क घूमने की हसरत पालने वालों के लिए अपना कतर्नियाघाट बेहतर विकल्प है। हर साल 15 नवंबर को यहां पर्यटन सत्र शुरू होता है और 15 जून को इसे बंद कर दिया जाता है। रात में यहां रुकने की सोच रहे हैं तो वन विभाग से लेकर निजी गेस्ट हाउस भी उपलब्ध हैं। बीते सीजन में यहां 15 हजार पर्यटक आए थे। इस बार हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की तैयारी है। इससे यह संख्या बढ़ेगी। वन विभाग के अनुसार यहां 59 बाघ, 200 हाथी, 15 गैंडे हैं।
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महाराजा सुहेल देव की शौर्य गाथा
चित्तौरा ब्लॉक क्षेत्र में महाराजा सुहेलदेव का स्मारक बनाया गया है। यहां पहुंच महाराजा सुहेल देव की शौर्य गाथा को जानने और सुनने का अवसर मिलेगा। मनोरम प्राकृतिक छटा भी लुभाएगी। झील में बोटिंग की सुविधा भी जल्द मिलेगी।
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धार्मिक पर्यटन के लिए अयोध्या पहली पसंद

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अयोध्या बना टॉप टूरिंग प्लेस। - फोटो : अमर उजाला।

काशी, मथुरा, प्रयागराज नहीं अब अयोध्या धार्मिक पर्यटन के लिए पहली पसंद बनकर उभरी है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले नौ माह में अयोध्या में 11 करोड़ पर्यटक पहुंचे हैं। राममंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में पांच गुना पर्यटक बढ़े हैं तो यहां की अर्थव्यवस्था को भी पंख लगे हैं। रोजगार के साधन बढ़े हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां अयोध्या में निवेश करने के लिए कतारबद्ध हैं।

मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते सदियों तक संतप्त रहने वाली अयोध्या आज पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र है। जिस अयोध्या में सुविधाओं की कमी के चलते लोग आने से कतराते थे, आज वही अयोध्या निखर, संवर उठी है। इसके मूल में सिर्फ और सिर्फ राममंदिर का निर्माण है। आज अयोध्या की पहचान संकरी गलियां नहीं बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त रामपथ, भक्तिपथ, धर्मपथ व श्रीरामजन्मभूमि पथ है। 50 हजार करोड़ की योजनाओं से अयोध्या को लगातार सजाया-संवारा जा रहा है।

ऐसे पहुंचे अयोध्या 
अयोध्या में आवागमन के साधन बढ़े हैं। एयरपोर्ट का निर्माण होने से देश-दुनिया से कनेक्टिविटी बढ़ी है। नई-नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है। पहले पर्यटक सुबह आते थे और शाम को लौट जाते थे। तब अयोध्या में ठहरने के उत्तम प्रबंध नहीं थे। अब आधुनिक सुविधाओं से युक्त होटलों का निर्माण हो चुका है, जिसके चलते पर्यटक अयोध्या में दो से तीन दिन ठहर रहे हैं। इससे अयोध्या की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

बलरामपुर : सोहेलवा का सौंदर्य

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सोहेलवा का सौंदर्य - फोटो : अमर उजाला।

बरतानिया हुकूमत के समय बंगाल टाइगर के प्राकृतिक वास के रूप में विख्यात सोहेलवा पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान के साथ उभरा है। विदेशी परिंदों की चहचहाहट पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। यहां पक्षियों की 400 प्रजातियों का अद्भुत संसार है। प्रकृति को करीब से जीने और सुकून की तलाश में भटकने वालों के लिए यह बेहतर स्थल है। यहां बाघ की दहाड़ के साथ ही हिरन, तेंदुआ व भालू के भी दीदार कर सकते हैं। हिमालय की पर्वत शृंखलाएं भी रोमांचित करती मिलेंगी।

ऐसे पहुंचें
तुलसीपुर से सोहेलवा जंगल तक पहुंचने के लिए निजी वाहन बेहतर विकल्प है। ट्रेन या सड़क मार्ग से लखनऊ से सोहेलवा पहुंचने के लिए पहले तुलसीपुर पहुंचना होगा। लखनऊ से तुलसीपुर की दूरी करीब 190 किलोमीटर है। यहां तक रोडवेज बस सेवा भी है।

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श्रावस्ती : बुद्ध से महाभारत काल तक

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श्रावस्ती में स्थित कच्ची कुटी। - फोटो : amar ujala

 शिवालिक पर्वत मालाएं, सुहेलवा व भिनगा जंगल का सौंदर्य, पांडव कालीन विभूति नाथ मंदिर, तथागत भगवान बुद्ध की तपोस्थली, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान संभवनाथ की जन्मस्थली के दर्शन करने हैं तो श्रावस्ती आना होगा। इतना ही नहीं, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पुत्र महराज कुश की राजधानी, सीताद्वार झील भी है। यह सब देखने के लिए समय जरूर निकालें।

विकास से बेहतर होगी बात
बौद्ध तपोस्थली के विकास के लिए भूमि का चयन किया जा रहा है, जिसके बाद आदर्श जलाशय, पार्क व ऑडिटोरियम का निर्माण किया जाएगा। सीताद्वार में राज्य योजना से बेंच, डस्टबिन, सीसी व इंटरलाकिंग का कार्य चल रहा है। करीब सात सौ बीघे क्षेत्र में फैली सीताद्वार झील के चारों तरफ परिक्रमा मार्ग, लाइटिंग, लोटस पार्क, नौकायन व लाइटिंग की व्यवस्था की जानी है। फिलहाल अभी प्राचीन भग्नावशेष व प्राकृतिक सौंदर्य ही लोगों को मोहित कर रहा है। विकास कार्य के बाद पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ेगी भी।

गोंडा : सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन का संगम

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गोनार्द (गोंडा) की विविधता - फोटो : अमर उजाला।

अवध का असल दीदार गोनार्द (गोंडा) की विविधता के बिना अधूरा है। यह ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रही है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के साथ ही तैयार हो रहे सांस्कृतिक परिक्षेत्र में जिले को प्राथमिकता मिली है। छपिया के स्वामी नारायण मंदिर से लेकर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग में करनैलगंज तक के स्थलों को शामिल किया गया है। यह पर्यटन के लिए शुभ है।

पार्वती अरगा पक्षी विहार में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक भ्रमण करने के लिए आते हैं। यहां सर्द मौसम में विदेशी पक्षी आते हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने पार्वती अरगा पक्षी विहार के विकास का प्रस्ताव तैयार करने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की टीम के साथ निरीक्षण किया है। तरबगंज विधायक प्रेमनरायन पांडेय ने भी धार्मिक स्थलों के विकास के लिए प्रस्ताव दिया है।

सुल्तानपुर : श्रीराम भी, हनुमान भी

राम के साथ ही हनुमान का जुड़ाव जिले को धार्मिक पर्यटन में खास स्थान दिलाता है। धोपाप जहां श्रीराम को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली। रामनवमी एवं ज्येष्ट शुक्ल की दशमी को यहां स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। विजेथुआ महावीरन धाम कालनेमि वधस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। रामायण काल से जुड़े इस पवित्र धाम में हनुमानजी दक्षिणमुखी हैं। पौराणिक मान्यता है कि लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए हनुमानजी संजीवनी बूटी लाने हिमालय पर जा रहे थे। रावण के भेजे मायावी राक्षस कालनेमि का वध हनुमानजी ने इसी विजेथुआ धाम पर किया और मकरीकुंड सरोवर में स्नान किया। नागपंचमी के बाद पड़ने वाले क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय मंगलवार, बुढ़वा और छोटा मंगलवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है।

नैमिषारण्य : शुरू होगी हेली सेवा

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नैमिषारण्य - फोटो : अमर उजाला।

 नैमिषारण्य में शिव व शक्ति का अद्भुत साक्षात्कार होता है। यहां देवी सती का हृदय गिरा इसलिए देवी को ललित यानि कोमल माना गया और उनका नाम ललिता देवी पड़ा। यहां देवदेवेश्वर धाम की स्थापना स्वयं वायुदेव ने शिव आराधना के लिए की थी। इसका वर्णन वायु पुराण में भी है।

शिवलिंग का स्वरूप दिन में तीन बार परिवर्तित होता है। सुबह बाल रूप में, दोपहर में रौद्र रूप और शाम को दयालु रूप में दर्शन होते हैं। यहां देश व विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हेलीपोर्ट का निर्माण पूरा हो गया है। इसे अयोध्या व काशी के साथ ही अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ा जाएगा।

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