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UP: जबरन मतांतरण केस की सुनवाई कर रहे विशेष जज ने मांगी बिना शर्त माफी, ये था पूरा मामला

Fri, 19 Apr 2024 12:06 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 19 Apr 2024 12:06 AM IST
सार

मामले में विशेष जज के खिलाफ हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। याची ने हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका दायर कर विशेष जज के 19 व 20 जनवरी 2024 के आदेशों को चुनौती दी थी। 

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Special Judge apologised in a forceful conversion case.
- फोटो : ANI

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जबरन मतांतरण के एक केस का विचारण कर रहे विशेष जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है। विशेष जज के मुस्लिम अधिवक्ताओं के शुक्रवार को केस की पैरवी करने से मना कर नमाज के लिए जाने पर कुछ अभियुक्तों के लिए एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त करने पर कोर्ट ने कहा कि यह धार्मिक आधार पर भेदभाव दिखाता है। विशेष जज ने इसके लिए हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी भी मांगी।

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न्यायमूर्ति शमीम अहमद की एकल पीठ ने यह आदेश मतांतरण केस के अभियुक्त मोहम्मद इदरीस की याचिका पर दिया। याची ने हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका दायर कर विशेष जज के 19 व 20 जनवरी 2024 के आदेशों को चुनौती दी थी। पहले, हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बीते पांच मार्च को याची के संदर्भ में उक्त दोनों आदेशों पर स्थगन दे दिया था, जिसके बाद विशेष जज ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में याची के संबंध में एमिकस क्यूरी देने वाले अपने आदेश पर 11 मार्च को रोक लगा दी, किन्तु अन्य अभियुक्तों को एमिकस क्यूरी देने की बाबत अपने आदेश को यथावत रखा।
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याचिका पर जब 15 अप्रैल को हाईकोर्ट में पुन: सुनवाई हुई तो न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने विशेष जज पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट के पांच मार्च के आदेश को ठीक से नहीं समझा। न्यायमूर्ति अहमद ने कहा कि विशेष जज ने 11 मार्च को इलेक्ट्राॅनिक सुबूतों को देने के बाबत कोई आदेश क्यों नहीं पारित किया।
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न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने कहा कि विशेष जज त्रिपाठी ने याची सहित कुछ अन्य अभियुक्तों को एमीकस क्यूरी देने का जो आदेश दिया है वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 के तहत प्रदत्त मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है और यह धार्मिक विभेद की श्रेणी में आता है। ऐसा आदेश कुछ अभियुक्तों को अपनी पसंद के धर्म के अधिवक्ता से वंचित कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि विशेष जज का आदेश कदाचरण की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने उन्हें 15 अप्रैल को तलब किया तो आदेश के अनुपालन में विशेष जज त्रिपाठी हाईकोर्ट में पेश हुए और उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी।

दरअसल, विशेष जज की कोर्ट में जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में मौलाना मोहम्मद उमर हैदर सहित अन्य अभियुक्तों का विचारण चल रहा है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 16 दिसंबर 2022 को सुनवाई के दौरान आदेश दिया था कि विचारण की कार्यवाही शीघ्र और प्रयास करके एक वर्ष में पूरी की जाए, जिसके बाद विशेष जज ने दिन प्रतिदिन सुनवाई करने की कार्यवाही शुरू की।


19 जनवरी 2024 को कुछ अभियुक्तों के अधिवक्तागण शुक्रवार को नमाज अदा करने के लिए जाने की बात कहकर कोर्ट से चले गये। कोर्ट ने अगले दिन 20 जनवरी 2024 को जिन अभियुक्तों के अधिवक्ता मुस्लिम थे, उनके लिए एमीकस क्यूरी भी नियुक्त कर दिए कि यदि उनके मुस्लिम अधिवक्ता न उपस्थित रहें तो एमीकस क्यूरी केस के विचारण में सहयोग करें। इसके साथ ही कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को मांगने की अभियुक्तों एक अर्जी यह कहकर खारिज कर दिया कि जो ओपन सोर्स पर यूआरएल पर उपलब्ध हैं जिन्हें डाउनलोड किया जा सकता है।

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