फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   special children of drishti samajik sansthan are preparing mask in lucknow

कोरोना को चुनौती दे रहीं 'विशेष बच्चियां', मास्क बनाकर कर रही हैं निशुल्क वितरण

Wed, 01 Apr 2020 06:38 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 01 Apr 2020 06:38 PM IST
विज्ञापन
special children of drishti samajik sansthan are preparing mask in lucknow
दृष्टि सामाजिक संगठन के बच्चे मास्क तैयार कर रहे हैं। - फोटो : amar ujala
कोरोना के खिलाफ जंग में बड़ों के साथ बच्चे भी कूद पड़े हैं। ऐसी ही तीन विशेष बच्चियां हैं पूजा, मुस्कान और पूनम। व्याधियों को भुला कर भी इस कठिन समय में समाजसेवा में जुट गई हैं। ये तीनों बच्चियां इन दिनों युद्ध स्तर पर मास्क तैयार कर रही हैं। तो वहीं दूसरी ओर कैंसर पीड़ित बच्चों की माताएं भी ग्रामीणों के लिए मास्क तैयार कर रही हैं। खास बात यह है कि वे इन्हें निशुल्क वितरित कर रही हैं।
विज्ञापन


जानकीपुरम स्थित दृष्टि सामाजिक संस्थान में रहने वाली मुस्कान, पूजा और पूनम विशेष बच्चियां हैं। ये अपनी कई शारीरिक ये समझ नहीं सकतीं कि कोरोना क्या है, बस इनकी ट्रेनर और संस्थान की डायरेक्टर शालू ने इन्हें इशारे से समझा दिया है कि कोराना से बचने के लिए मास्क पहनना जरूरी है। तब से अब तक ये न केवल मास्क की अहमियत समझ रही हैं बल्कि उन्हें खुद तैयार करने में भी जुटी हैं।शालू बताती हैं कि हमारे यहां 260 बच्चे हैं। इन सबके लिए मास्क खरीदना संभव नहीं था। इसलिए हमने इसे बनवाने का फैसला किया। सिलाई की ट्रेनिंग इन बच्चों को दी ही जाती है। हमने इन्हें सिखाया और फिर तो जैसे रफ्तार पकड़ ली इन्होंने। खुद अपने लिए और संस्थान के पूरे स्टाफ  के लिए 300 के करीब मास्क इन बच्चों ने महज सात दिन में तैयार कर डाले।
विज्ञापन


बैंकवाले आए तो थे दान देने, मास्क का ऑर्डर देकर चले गए
शालू कहती हैं कि एक राष्ट्रीयकृत बैक के अधिकारी बच्चों के लिए कुछ सामान लेकर आए थे। उन्होंने मास्क की जरूरत पूछी। हमने उन्हें बताया कि बच्चे खुद ही तैयार कर रहे हैं तो उन्होंने 500 मास्क बनाने का ऑर्डर दे दिया। दस रुपये है मास्क की कीमत और पालीप्रोपलीन से बना है जिसे इस्तेमाल कर फेंका जा सकता है। पूजा, मुस्कान और पूनम का सहयोग अन्य बच्चे भी कर रहे हैं। शालू ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान बच्चों को व्यस्त रखना ज्यादा जरूरी है। खासकर इन विशेष बच्चों को। शालू कहती हैं कि ये हमारी कोरोना फाइटर्स हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

अपना दर्द भूलकर ग्रामीणों के लिए मास्क तैयार कर रहीं महिलाएं

special children of drishti samajik sansthan are preparing mask in lucknow
अपना दर्द भूलकर ग्रामीणों के लिए मास्क तैयार कर रहीं महिलाएं। - फोटो : amar ujala

दुनिया में कितना गम है, मेरा गम कितना कम है...। जी हां, दूसरों का दुख देखिए तो अपना दर्द खुद-ब-खुद कम लगने लगेगा। यह कहना है केजीएमयू में भर्ती कैंसर पीड़ित बच्चों की माताओं का।

एक तरफ  अपने बच्चे का इलाज तो दूसरी तरफ  कोरोना का डर। इन सबको भूल कर ये महिलाएं जुटी हैं मास्क तैयार कर उन्हें गांव के लोगों में निशुल्क बांटने में।

इनका नेतृत्व संभाला है काकोरी निवासी सरला ने जिनका बच्चा खुद कैंसर का मरीज था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। सरला ने ईश्वर  वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से खुद ही मास्क बनाने का जिम्मा लिया है।

उनका साथ दे  रहे हैं धर्मेन्द्र, विमला, माया और सुनीता। ये मास्क निशुल्क बांटे जा रहे हैं। सरला का कहना है कि अब तो बाहर के लोग गांव तक पहुंच गए हैं, वहां सुरक्षा के उपाय करने जरूरी है। एक दिन में कम से कम 100 मास्क खुद सरला तैयार कर रही हैं। टीम के कुछ सदस्य इन्हें गांव तक पहुंचाने में लगे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed