हादसे के बाद ट्रेन के अंदर ही होगा ऑपरेशन, तुंरत मिलेगा इलाज
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रेल हादसे की स्थिति में घायलों को तुरंत राहत देने के लिए रेलवे ने लखनऊ डिवीजन को खास एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन मुहैया कराई है। पूरी तरह से वातानुकूलित यह ट्रेन तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
135 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ने वाली इस ट्रेन में अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर भी है। ट्रेन का लोकल ट्रायल होने के बाद इसे 31 मार्च के पहले पटरियों पर लाया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक ट्रेन हादसों से निपटने के लिए लखनऊ डिवीजन को दी गई एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन मेडिकल वैन की तरह काम करती है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री से बने कोच लगी इस ट्रेन को बीते माह मुख्य संरक्षा अधिकारी ने पास कर दिया है।
लखनऊ से सुल्तानपुर रूट पर होगा ट्रायल
ट्रेन 135 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड में दौड़ेगी जबकि मौजूदा ट्रेन की स्पीड 90 किमी है। इसका लोकल ट्रायल लखनऊ से सुल्तानपुर रूट के सिंदुरवा स्टेशन तक किया गया था।
पहला ट्रायल सफल होने के बाद अभी इसके दो से तीन-ट्रायल और होंगे। 31 मार्च से पहले इसे पूरी तरह से पटरियों पर दौड़ा दिया जाएगा।
लखनऊ डिवीजन के जनसंपर्क अधिकारी अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने लखनऊ डिवीजन को एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन के अलावा रोड कम रेल व्हीकल दिए हैं।
रिलीफ ट्रेन जहां शीघ्रता से राहत देने में सक्षम है, वहीं रोड कम रेल व्हीकल से आपदा प्रबंधन का कार्य तेजी से शुरू हो सकेगा। ट्रायल और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन्हें पटरियों पर लाया जाएगा।
एक्सीटेंड रिलीफ ट्रेन की खास बातें
•एसी गाड़ी में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ऑपरेशन थिएटर।
•लंबे समय तक दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए डीप फ्रीजर।
•इमरजेंसी के दौरान एक साथ तीस लोगों के बैठने की सुविधा।
•विशेष बर्थ के साथ-साथ मरीजों को लिटाने के लिए बेड उपलब्ध।
•स्पीड पोटेंशियल अधिक होने से 135 किमी/प्रति घंटा की रफ्तार
•एक इंजन फेल होने पर दूसरा इंजन करेगा भरपूर काम।
•मौजूदा रिलीफ ट्रेन में इंजन अलग से लगाने का भी प्रावधान।
सड़क ही नहीं ,पटरी पर भी दौड़ेगा ट्रक
राहत एवं आपदा कार्य के लिए लखनऊ डिवीजन को एक और सहूलियत रोड कम रेल व्हीकल के रूप में मिली है। यह बड़ा-सा कंप्यूटराइज्ड ट्रक है, जो सड़कों के साथ पटरियों पर भी दौड़ सकता है।
ट्रक मर्सिडीज कंपनी से रेलवे बोर्ड ने अपनी जरूरतों के हिसाब से तैयार कराया है। इसकी लागत आठ करोड़ रुपये है। इसमें 40 टन भार उठाने की क्षमता वाली क्रेन भी है, जो डिरेल पहियों को उठाकर पटरियों पर रख देती है।
इसमें लगे फायर फाइटिंग इक्विपमेंट आग को तुरंत काबू कर सकते हैं। पहियों में लगे एक्सेल लॉक होने की स्थिति में वाहन उसे उठाकर चलाने लायक बना देता है। इसके लिए ड्राइवरों की स्पेशल ट्रेनिंग ट्रैफिक पुलिस के चंदौसी स्थित ट्रेनिंग सेंटर में चल रही है।