अखिलेश के लिए भी आफत बना 'यूपी का कानून'
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लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सरकार की छवि बदलने में जुटे हैं। कई स्तर पर किए गए ताबड़तोड़ फैसले इसकी बानगी हैं लेकिन कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर लगातार मिल रही नाकामी से सरकार के इरादों पर पानी फिरता दिख रहा है।
दुखद तो यह कि प्रदेश में अप्रिय घटनाओं की फेहरिश्त दिनों दिन बढ़ती जा रही है। विपक्षी दल खासकर भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार पर एक वर्ग विशेष के तुष्टीकरण का आरोपी लगाती रही।
चुनाव में भाजपा को इसका फायदा मिलता नजर आया। चुनाव बाद मुख्यमंत्री ने ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू किए तो लोगों को लगा कि सरकार अपनी छवि पूरी तरह से बदल देना चाहती है।
इन फैसलों से दिए संदेश
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को हटाने का फैसला हो या अल्पसंख्यक बेटियों के लिए संचालित ‘हमारी बेटी-उसका कल’ योजना को ठंडे बस्ते में डालने का, इन निर्णयों से उन्होंने कुछ ऐसा ही संदेश दिया।
सपा सरकार ने सत्ता संभालते वक्त उस्मानी को नौकरशाही की कमान देकर और बाद में हमारी बेटी उसका कल योजना शुरू कर अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों के प्रति अपने झुकाव का संकेत दिया था।
राज्यमंत्री पवन पांडेय की बर्खास्तगी और कई मंत्रियों के कद में काट-छांट से मुख्यमंत्री अखिलेश जहां बदले तेवर में नजर आए वहीं सरकारी योजनाओं में शपथपत्र की छूट और जनता से सीधे संपर्क बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर आने का फैसला भी सरकार के बदले रुख का ही संकेत समझा गया।
सांप्रदायिक वारदातों ने खेल बिगाड़ा
चुनाव बाद मेरठ के पीरबरान में दो वर्गों के बीच एक प्याऊ को लेकर सांप्रदायिक हिंसा के बाद से प्रदेश में कानून-व्यवस्था को चुनौती देती घटनाएं थम नहीं रही हैं।
बदायूं में दो लड़कियों के साथ रेप व हत्या का मामला हो या मुरादाबाद के कांठ की सांप्रदायिक हिंसा, मोहनलालगंज में महिला की गैंगरेप के बाद हत्या हो या सहारनपुर की हिंसा, ये घटनाएं सरकार के इरादों पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं।
छवि सुधारने को उठाए कदम
-मुख्यमंत्री ने शुरू किया औचक निरीक्षण। श्रावस्ती के बाद राजधानी में रिवर व्यू एन्क्लेव का निरीक्षण किया। कई अफसर नपे।
-नए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने वरिष्ठ अफसरों के साथ जिलों में पहुंचकर शुरू की समीक्षा।
इस तरह की कोशिशें शुरू की
- प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी ने मंडल स्तर पर कानून-व्यवस्था की समीक्षा शुरू की।
- सरकार ने गृह जिलों में पुलिस कर्मियों की तैनाती के अपने ही फैसले को वापस लिया।
- लंबे अर्से से उलझी प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के शिक्षकों की भर्तियां तेजी से शुरू कराई।
- सरकारी योजनाओं में शपथपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर लोगों को बड़ी राहत दी।
- जन समस्याओं की सुनवाई व समाधान के लिए ई-गवर्नेंस का प्रयोग शुरू किया।
- आगंतुकों के लिए सरकारी कार्यालयों के बाहर सुझाव व शिकायत पेटिका लगाने का आदेश हुआ।
सोशल मीडिया का लिया सहारा
- मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से लेकर पूरी सरकार सोशल मीडिया पर उतरी।
- सचिवालय में पेपरलेस कामकाज का फैसला। आईटी विभाग से शुरू हुई पहल।
- मुस्लिम लड़कियों के लिए शुरू की गई ‘हमारी बेटी-उसका कल’ योजना बंद की।
- कब्रिस्तानों के साथ अंत्येष्टि स्थल की चारदीवारी के लिए पहली बार बजट का प्रावधान किया।
- सहारनपुर में सांप्रदायिक दंगे ने कानून-व्यवस्था की मुश्किलें कम न होने का संदेश दिया।
- मोहनलालगंज में महिला के साथ गैंगरेप व हत्या से सरकार की छवि पर आई आंच।
घटनाओं ने मेहनत पर पानी फेरा
- मुरादाबाद के कांठ में मंदिर से लाउडस्पीकर उतरवाने पर हिंसा व विरोध प्रदर्शन।
- बदायूं में दो बहनों के साथ रेप के बाद हत्या, देश-दुनिया तक किरकिरी।
- मुजफ्फरनगर के खतौली रसूलपुर कैलोरा में शिव मंदिर पर बज रहे लाउडस्पीकर को बंद करने पर बवाल।
- दादरी में भाजपा नेता विजय पंडित की हत्या के बाद हिंसा। सपा नेता पर कांड में शामिल होने का आरोप।
- अमेठी में कांग्रेस नेता जंग बहादुर सिंह के बेटे महेंद्र प्रताप सिंह की हत्या। सपा एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह भी आरोपी।
- बुलंदशहर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नेता की हत्या।
- फीरोजाबाद में बदमाशों ने गश्त के दौरान दो सिपाहियों की हत्या कर दी।