SP Manifesto: अल्पसंख्यकों पर फोकस करने से किया रणनीतिक परहेज, सपा की इस चाल के पीछे की राजनीति को समझिए
सपा के घोषणा पत्र में कांग्रेस की कई गारंटियां शामिल की गई हैं, लेकिन महिलाओं के लिए किए गए दोनों के वादों में एकरूपता नहीं है। सपा ने महिलाओं को 3000 रुपये प्रति माह देने की घोषणा की है।
विस्तार
सपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में बड़े ही रणनीतिक ढंग से अल्पसंख्यकों पर फोकस करने से परहेज किया है। सपा के घोषणा पत्र में कांग्रेस की कई गारंटियां शामिल की गई हैं, लेकिन महिलाओं के लिए किए गए दोनों के वादों में एकरूपता नहीं है। कांग्रेस ने जहां गरीब महिलाओं के लिए 1 लाख रुपये सालाना, तो सपा ने 3 हजार रुपये प्रति माह यानी 36 हजार रुपये सालाना देने की घोषणा की है।
सपा ने अपने घोषणापत्र को ‘जनता का मांग पत्र’ बताया है। अल्पसंख्यक सपा के आधार वोट माने जाते हैं, लेकिन इस घोषणापत्र की सबसे खास बात यह है कि तीसरे पृष्ठ पर अल्पसंख्यकों का जिक्र है। यह भी जिक्र पीडीए की रणनीति बताने के लिए किया गया है। इसमें कहा गया है कि पीडीए मायने हैं- पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक एवं आधी आबादी को अवसरों की समानता और भागीदारी दिलाने के लिए जन आंदोलन।
जानें क्या कहते हैं राजनीति के जानकार
समकालीन राजनीति के जानकार और जेएनयू के सेवानिवृत प्रो. रवि श्रीवास्तव कहते हैं कि धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण सपा के लिए मुफीद नहीं है। यही वजह है कि अल्पसंख्यकों के लिए अलग से खास घोषणा करने से बचा गया है। इसके बजाय जातिगत समीकरण साधने के लिए जातीय जनगणना, एससी, एसटी व ओबीसी के खाली पद भरने की घोषणा का दांव चला है।
संयुक्त रूप से घोषणापत्र का जारी न करना चर्चा में
समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए जारी अपने घोषणापत्र में कांग्रेस के न्याय व अधिकार सहित कई गारंटियों को शामिल किया है। यूपी में विपक्षी गठबंधन इंडी में सपा और कांग्रेस शामिल है, लेकिन यहां संयुक्त रूप से साझा घोषणापत्र का जारी न करना चर्चा में है। हालांकि, कांग्रेस की तर्ज पर सपा ने अपने घोषणा पत्र में 2025 तक जाति आधारित जनगणना कराने और इसके आधार पर 2029 तक सभी को न्याय व हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की बात कही है।
सपा ने किसानों को भी साधने की कोशिश की
सपा ने सत्ता मिलने पर अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़े वर्गों के सभी खाली पद भरने और निजी क्षेत्र में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने का वादा किया है। दूध सहित सभी फसलों पर स्वामीनाथन फाॅर्मूले के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और इसकी कानूनी गारंटी देने की बात घोषणापत्र में कही है।