{"_id":"265a181d91b0f5596ec5fa593f519ef5","slug":"sp-rally-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो रैलियों में बांटी जाएं टोपियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो रैलियों में बांटी जाएं टोपियां
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sun, 10 Nov 2013 01:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़ रैली के बाद सपाइयों में बहस हो रही थी कि मुसलमानों की उसमें भागीदारी कितनी रही।
विज्ञापन
चूंकि चर्चा सपा दफ्तर में थी लिहाजा दावे-प्रतिदावे होने लगे। एक ने कहा, मुसलमानों की तादाद कम थी। तो दूसरे ने कहा, 25 फीसदी से कम नहीं थे। दावों के समर्थन में अपने-अपने तर्क।
किसी ने कहा, मोदी की रैली की तरह टोपियां तो बांटी नहीं गईं जो मुसलमान अलग से पहचाने जाते।
दूसरे ने तपाक से कहा, आगे से सपा की रैलियों में भी मोदी की सभाओं की तरह टोपी की व्यवस्था हो जाए तो बेहतर रहेगा।
इससे माहौल भी बनेगा और रैलियों में मुस्लिमों की तादाद को लेकर बहस भी नहीं करनी पड़ेगी।
कैमरे खुद बता देंगे, किसकी कितनी संख्या है। लगता है कि सपाइयों की चिंता रैली की नहीं मुस्लिमों की भागीदारी की है।