...यूं ही नहीं संघ और मोदी हैं सपा के निशाने पर
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन से साफ हो गया कि उसकी कोशिश विधानसभा के अगले चुनाव में भाजपा के साथ ही अखाड़ा सजाने की है। उसे पता है कि भाजपा से दो-दो हाथ करने पर 2017 में उसका मकसद हल हो सकता है।
इसीलिए अधिवेशन के दौरान नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लेकर निशाने साधे गए।
हालांकि मंच से तो ज्यादातर वक्ताओं ने विधानसभा के अगले चुनाव में सपा को फिर बहुमत मिलने का दावा किया, पर कुछ प्रमुख नेताओं ने बार-बार पार्टी में एकजुटता, गद्दारों को दंडित करने और पिछड़ों व मुसलमानों को सांप्रदायिक शक्तियों से सावधान रहने की बात कही।
इससे साफ हो गया कि उपचुनाव में जीत को मोदी का फीका पड़ता जादू जैसे दावे करने के बावजूद सपाई खेमे में 2017 के विधानसभा चुनाव की चिंताएं बरकरार हैं।
मुलायम को पता है कि लोग संतुष्ट नहीं
शायद इसीलिए अंतिम दिन मुलायम सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं को बार-बार यह बात समझाने का प्रयास किया कि सत्ता में भले हों लेकिन अन्याय के खिलाफ संघर्ष न बंद करें।
उन्होंने साफगोई से स्वीकार किया कि किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना दिलाने का वादा पूरा नहीं कर पाए। इससे जाहिर हो गया कि सपा मुखिया समर्थकों को अपनी मजबूरियां बताकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
भले ही दूसरे नेता घोषणा पत्र के 90 प्रतिशत वादे पूरा कर देने का दावा कर रहे हों लेकिन मुलायम को एहसास है कि सरकार के कामकाज से लोग बहुत संतुष्ट नहीं हैं।
इसीलिए उन्होंने किसानों और पिछड़ों के लिए अब तक कुछ न कर पाने की बात कही। साथ ही आश्वस्त किया कि केंद्र से बात करके इस सिलसिले में कुछ न कुछ करने की कोशिश जरूर करेंगे।
ध्रुवीकरण की कवायद
राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि सपा के रणनीतिकारों को पता है कि लोकसभा चुनाव में मोदी की अगुआई में भाजपा ने पिछड़ों व दलितों के बीच सेंधमारी की। उधर, बसपा और कांग्रेस की तरफ से मुसलमानों में वोटों के बंटवारे ने सपा को नुकसान पहुंचाया। इसीलिए उन्होंने अधिवेशन के जरिये भाजपा व संघ परिवार पर निशाना साध दिया है, जिससे मुस्लिम वोट उनके साथ लामबंद हो सके।
सपा जानती है कि वह भाजपा पर जितना हमला बोलेगी, मुसलमानों के बीच उसकी पैठ उतनी ही बनेगी। यही वजह रही कि आजम हों अथवा अहमद हसन या फिर पार्टी के दूसरे नेता, उन्होंने मुसलमानों को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लव जेहाद से लेकर ईद की बधाई तक को मुद्दा बनाया गया।
भाजपा को भी सुविधा: उधर, भगवा टोली को भी सपा के इस रवैये से फायदा दिख रहा है। उसे पता है कि सपा के पक्ष में मुसलमान जितने ज्यादा लामबंद होंगे, उतना ही ज्यादा उसे लाभ होगा।
शायद इसीलिए उसकी तरफ से सपा के हमलों पर बहुत ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही है। दी भी जाती है तो इस तरह कि सपा की मुस्लिम हितैषी छवि का प्रचार करके लाभ हासिल किया जा सके।