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लॉकडाउन हो या अनलॉक, श्रमिकों का भरोसा जीतने में नाकाम रही सरकार: अखिलेश यादव
Mon, 29 Jun 2020 10:00 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 29 Jun 2020 10:00 AM IST
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अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
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सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश में भाजपा सरकार ने सवा तीन साल से ज्यादा वक्त में जनता के साथ छल-कपट की राजनीति करने के अलावा उसने कोई काम अपने नाम नहीं किया है। लॉकडाउन हो या फिर अनलॉक, भाजपा सरकार श्रमिकों में विश्वास जगाने में पूरी तरह नाकाम है।
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अखिलेश यादव ने रविवार को कहा, कि वस्तुत: झूठ ही भाजपा का सच है। प्रदेश के मुखिया जिस तरह बिना जमीन या खेत के फसल लहलहा देते हैं और उसी तरह हर श्रमिक को घर बैठे रोजगार दे रहे हैं। एक एमओयू से 10 उद्योग जादू की छड़ी से पैदा कर देते हैं।
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यह बात अलग है कि प्रदेश विकास के मामले में पिछड़ता जा रहा है। आखिर श्रमिक यह क्यों कह रहे हैं कि अगर प्रदेश में रोजगार की व्यवस्था होती तो वे वापस जाने की क्यों सोचते। प्रदेश में दूसरे स्थानों से केवल अकुशल श्रमिक ही नहीं आए हैं, उनमें कई कुशल श्रेणी के लोग भी हैं।
कोई उद्योग लगा नहीं है, जहां भाजपा सरकार उन्हें खपाएगी। समाजवादी सरकार ने जो विश्वस्तरीय योजनाएं बनाई थीं उनको रोककर भाजपा ने अतिकुशल मानव शक्ति के उपयोग का रास्ता ही बंद कर दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोरोना संकट से निपटने में जिस राज्य सरकार को मॉडल बताया है, उसमें करोना मरीजों की संख्या रोज बढ़ती जाती है। प्रमाण पत्र जारी करने की इतनी जल्दी भी क्या ? लोकतंत्र के साथ ऐसा मजाक कहीं नहीं सुना गया होगा।
कई जिलों में बंद हैं मनरेगा
सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में मनरेगा का काम तीन वर्षों से बंद है। मनरेगा मजदूरों को इस बीच कोई दूसरा काम भी नहीं मिल पाया। इससे श्रमिकों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। किसी तरह कर्ज लेकर परिवार के लिए दो वक्त की रोटी भी जुटाना मुश्किल है।
वैसे भी मनरेगा में एक वर्ष में 100 दिन ही काम कराने की व्यवस्था है। ऐसे तमाम श्रमिक जो 265 दिन बिना कोई काम रहते हैं, अर्द्ध बेकारी के शिकार हैं। उन्हें लगभग बेरोजगारों की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। उनके बारे में प्रदेश सरकार की कोई योजना नहीं है।
वैसे भी मनरेगा में एक वर्ष में 100 दिन ही काम कराने की व्यवस्था है। ऐसे तमाम श्रमिक जो 265 दिन बिना कोई काम रहते हैं, अर्द्ध बेकारी के शिकार हैं। उन्हें लगभग बेरोजगारों की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। उनके बारे में प्रदेश सरकार की कोई योजना नहीं है।