रायबरेली: भाजपा के खिलाफ कांग्रेस और सपा लामबंद, मिलकर लड़ेंगे जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव
रायबरेली में भाजपा को हराने के लिए सपा और कांग्रेस लामबंद हो गए हैं। सपा ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का निर्णय लिया है।
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कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में एक बार फिर भाजपा को जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में हराने के लिए सपा और कांग्रेस का गठजोड़ हो गया है। सपा ने कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही है। कांग्रेस ने पूर्व सांसद अशोक सिंह की बहू आरती सिंह पत्नी मनीष सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि सपा ने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।
सपा के पूर्व विधायक रामलाल अकेला के बेटे विक्रांत अकेला ने सबसे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र खरीदा था लेकिन पार्टी ने उनको टिकट नहीं दिया है। भाजपा ने रोहनिया से निर्दलीय उम्मीदवार रंजना चौधरी पर दांव लगाया है। इस चुनाव में बसपा कहीं भी नजर नहीं आ रही है। ऐसे में सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होना तय माना जा रहा है। हालांकि इस चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका भी बहुत अहम है।
सपा और कांग्रेस के मिल जाने से भाजपा शुरुआती दौर में कमजोर नजर आ रही हैं लेकिन सत्ता में होने की वजह से उसकी मजबूती से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कांग्रेस के गढ़ में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। 52 जिला पंचायत सदस्यों वाली जिला पंचायत में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन एक बार फिर चुनाव में कांग्रेस और भाजपा आमने सामने होगी।
सबसे खास बात यह है की बीते लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के सामने एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने चुनाव लड़ा था। दिनेश प्रताप चुनाव हार गए थे, लेकिन उन्होंने सोनिया को कड़ी टक्कर दी थी। इस तरह एक बार फिर रंजना चौधरी को पंचवटी परिवार यानी एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह भरपूर सहयोग कर रहे हैं। इस सीट पर पंचवटी परिवार का दो बार कब्जा रहा है।
एक बार एमएलसी की अनुज वधू सुमन सिंह, जबकि दूसरी बार एमएलसी के भाई अवधेश सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं। तीसरी बार अपना अध्यक्ष बनाने के लिए रंजना चौधरी मैदान में है, जिनको भाजपा ने अपना समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस को समर्थन देने और अपना प्रत्याशी न उतारे जाने की पुष्टि सपा के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने की है।
...तो क्या प्रियंका और अखिलेश में बातचीत के बाद लिया गया निर्णय
जिला पंचायत सदस्य का चुनाव होने के बाद सपा बराबर कहती रही कि इस बार वह जिला पंचायत पद के लिए अपना उम्मीदवार उतारेगी। इसी कड़ी में सपा के पूर्व विधायक के बेटे विक्रांत अकेला ने सबसे पहले नामांकन करने के लिए पर्चा खरीदा।
इस बारे में पूर्व विधायक रामलाल अकेला से बात की गई तो उनका साफ कहना था की पार्टी हाईकमान की अनुमति के बाद ही बेटे ने जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए पर्चा खरीदा। लेकिन ऐन मौके पर सपा ने दूसरा दांव खेल दिया।
ऐसे में जाहिर है कि कांग्रेस और सपा में उच्च स्तर पर बातचीत करने के बाद ही सपा ने कांग्रेस को समर्थन देने का निर्णय लिया होगा। सूत्रों का कहना है कि जिले की लोकसभा प्रभारी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव से बातचीत के बाद कांग्रेस और सपा में तालमेल की सहमति बनी।
इस संबंध में कांग्रेस के जिला प्रवक्ता विनय द्विवेदी और सपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र यादव का कहना है की सपा और कांग्रेस में उच्च स्तरीय बैठक के बाद ही यह निर्णय लिया गया। दोनों प्रवक्ताओं ने किसी नेता का नाम लेने से इनकार किया।