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मानवता शर्मसार: घर से बेदखल कर...माताओं को सड़क पर छोड़ रही संतानें, होश उड़ाने वाले वन स्टॉप सेंटर के आंकड़ें

Thu, 19 Dec 2024 08:51 PM IST
भूपेन्द्र सिंह गौरी त्रिवेदी, संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
गौरी त्रिवेदी, संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 19 Dec 2024 08:51 PM IST
सार

181 वन स्टॉप सेंटर में वृद्ध महिलाओं को सड़क पर छोड़ जाने के केस अधिक हैं। सभी 60 साल से अधिक उम्र की हैं। अप्रैल से नवंबर तक सात ने मां को छोड़ा। चार को सेंटर ने काउंसिल कर परिजन से मिला दिया।

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sons was evicted from his house and left on road In UP data of One Stop Centre was revealed
वन स्टॉप सेंटर की हकीकत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

'वह कबूतर क्या उड़ा छप्पर अकेला हो गया, मां की आंखें मुंदते ही घर अकेला हो गया', 'चलती फिरती हुई आंखों से अज़ा देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है'। शायर मुनव्वर राना की ये चंद लाइनें मां के किरदार को बताने के लिए कम पड़ जाएं, कुछ ऐसा मां का किरदार होता है। 

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मां जो अपने बच्चे को सीने से लगाकर रखती है। उसके रोने पहले ही मां का दिल धड़क जाता है। उस पालनहार मां को संतानें बड़ी होकर सड़क पर छोड़ दें, घर से बाहर कर दें, तो मानवता शर्मसार हो जाने को मजूबर हो जाती है। 

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किसी न किसी कारण से घर से बेदखल कर दिया

लखनऊ में वन स्टॉप सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में अप्रैल महीने से नवंबर माह में बाल विवाह, छेड़खानी, रेप, पॉक्सो दहेज उत्पीड़न आदि के केस की तुलना में वृद्ध महिलाओं के आंकड़े अधिक हैं। केस में वह महिलाएं ज्यादा हैं। इनमें संतानों ने किसी न किसी कारण से उन्हें घर से बेदखल कर दिया। 

2024 अप्रैल माह से नवंबर माह में वृद्ध महिलाओं के कुल 15 केस आए। तीन महिलाएं घर से भूलवश बीमारी के चलते आ गई थीं। वहीं 12 को उनके घर से बेसराहा करके सड़क पर छोड़ दिया गया था। सेंटर की ओर से इन तीन महिलाओं को काउंसिल के जरिए उनके घर पहुंचा दिया गया। 2023 में 19 महिलाओं के केस आए। इनमें 15 को उनके घर वालों ने छोड़ दिया। वहीं चार महिलाएं घर से भूलवश आ गई थीं।

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उत्पीड़न से परेशान होकर खुद चली आती हैं

वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह ने बताया कि अप्रैल से नवंबर के बीच घरेलू हिंसा, मानसिक मंदित, और पलायन के बाद वृद्द महिलाओं को बेघर करने के केस सबसे अधिक आए। इनमें कुछ महिलाएं बहू-बेटे के उत्पीड़न से परेशान होकर खुद ही चली आती हैं। 

हमारे कई बार कहने पर भी वह घर नहीं जाती हैं। कुछ महिलाओं से काउंसिल के दौरान पूछा भी जाता है लेकिन वह वृद्धाश्रम में रहना ज्यादा हितकर समझती हैं। मढ़ियांवा की एक 55 वर्षीय महिला को उनके परिवार के लोगों ने छोड़ दिया। उनकी बड़ी संवेदनशील कहानी थी। 

सेंटर ने महिला को बहू-बेटे से मिलवाया

उनके परिवार से काउंसिल कराकर उन्हें 181 की ओर से काफी संघर्ष कर मिलवाया गया लेकिन तीन महीने में उनकी मृत्यु हो गई। चिनहट की 60 वर्षीय महिला अपने घर से गुम होकर आ गई थीं। 181 सेंटर ने महिला को बहू-बेटे से मिलवाया।

भूलवश आने वाली वृद्ध महिलाओं पर केजीएमयू के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि डिमेंशिया शुरुआती दिनों में रोजमर्रा की चीजें भूलने तक रहती है लेकिन यह जैसे-जैसे बढ़ती है वैसे घर के सदस्यों, आस-पास के इलाके को भूलने के साथ बढ़ जाती है। 
 

बीमार महिलाओं के साथ अपनाएं ये तरीके

यह बीमारी ब्रेन की नसों के डिजेंरेट होने के कारण होती है। ज्यादातर 60 की उम्र के ऊपर देखने को मिलती है। इसके लिए उचित खान-पान और नियमित दिनचर्या उचित होती है। साथ ही परिवार के लोगों को लक्षण देखकर मरीज के हाथ पर पट्टी, टीशर्ट या कपड़े पर नाम, मोबाइल नंबर लिख देना चाहिए। ताकि, गुम होने की नौबत ही न आए।
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