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सोमनाथ की होर्डिँग्स से कुछ कह रहे मोदी?

Fri, 09 May 2014 02:00 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 09 May 2014 02:00 PM IST
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somnath temple hoardings in varanasi

बाबा विश्वनाथ की धरती पर प्रवेश करते ही पिंडरा से थोड़ा आगे एक होर्डिंग पर नजर पड़ती है। इस पर सोमनाथ मंदिर की तस्वीर दिखाई पड़ती है।

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कुछ आगे बढ़ने पर फिर ऐसी ही होर्डिंग दिखी तो दिमाग में तरह-तरह के सवाल उठने लगे। फिर सहसा ही जेहन में एक के बाद एक घटनाएं आकर गुजर जाती हैं।

भाजपा का नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना, मोदी का गुजरात के सरदार सरोवर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की संसार में सबसे ऊंची प्रतिमा के निर्माण का ऐलान, इसके लिए हर गांव के किसानों से खेती-किसानी वाले बेकार हो चुके औजारों का दान और अब विश्वनाथ की धरती पर सोमनाथ की तस्वीरों वाली होर्डिंग।
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ऐसा लगता है कि इन सबके बीच एक रिश्ता है। विश्वनाथ की धरती पर सोमनाथ की तस्वीरें यूं ही नहीं हैं।

तस्वीरों से लोगों को कुछ समझाने की कोशिश

somnath temple hoardings in varanasi

नरेंद्र मोदी का नामांकन के समय काशी में पंडित मदन मोहन मालवीय से लेकर डॉ. अंबेडकर तक की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और फिर गुजरात के अपने पैतृक गांव बडनगर (मेहसाणा) व काशी की एकरूपता के जिक्र के साथ- ‘न किसी ने भेजा और न आया बल्कि मां गंगा ने अपने बेटे को बुलाया है’ तथा ‘सोमनाथ की धरती से विश्वनाथ की धरती पर आया हूं’ जैसे वाक्य।

फैजाबाद की सभा में मोदी के मंच पर भगवान राम की तस्वीर और मंदिर के मॉडल वाला चित्र और अब यह होर्डिंग, भगवा टोली की तरफ से शुरू किए गए प्रतीकों से समीकरण साधने के अभियान का ही हिस्सा हैं।

ऐसा लगता है कि इन होर्डिंग के जरिये लोगों को बहुत कुछ बताने और समझाने की कोशिश की जा रही है।

सरदार पटले और सोमनाथ का कनेक्‍शन

somnath temple hoardings in varanasi

हर प्रतीक से साधते सियासी समीकरण अतीत की घटनाओं पर नजर डालें तो यह बात और साफ हो जाती है।

राम जन्मभूमि आंदोलन में भी सरदार पटेल और सोमनाथ का जिक्र होता रहा है।

भले ही भाजपा ने पिछले कुछ समय से मंदिर पर साफ-साफ बोलना बंद कर दिया हो लेकिन लोग भाजपा सहित और संघ की एक बात भूली नहीं होगी।

भाजपा सहित पूरा संघ परिवार यह कहता रहा है कि आजादी के बाद अगर पं. जवाहर लाल नेहरू की जगह सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रधानमंत्री होते तो अयोध्या, काशी और मथुरा की सांस्कृतिक समस्याओं का समाधान कब का हो चुका होता।

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तस्वीरों के पीछे भगवा टोली का संदेश

somnath temple hoardings in varanasi

भाजपा की तरफ से यह भी कहा जाता रहा है कि पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो कानून बनाकर सोमनाथ की तर्ज पर अयोध्या, मथुरा और काशी के मंदिरों का पुनरुद्धार किया जाएगा।

जाहिर है कि बाबा विश्वनाथ की धरती पर मोदी का चुनाव लड़ना और इस मौके पर लगाए गए सोमनाथ मंदिर के चित्र वाली इन होर्डिंग्स के जरिये भगवा टोली यह कहना चाहती है कि पहले वाली गलती सुधार दो।

पटेल न सही तो पटेल की राह पर चलने वाले सोमनाथ की धरती से काशी विश्वनाथ के दरबार का प्रतिनिधि होने की अभिलाषा पूरी कर दो। मोदी को देश की बागडोर सौंपने में सहभागी बन जाओ।

काशी ही क्यों

somnath temple hoardings in varanasi

वाराणसी को लघु भारत भी कहा जाता है। यहां सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि बौद्ध भी बड़ी संख्या में आते हैं। विदेशों से भी बड़ी तादाद में लोगों की आमद यहां होती है।

न सिर्फ पर्यटन और पूजा-पाठ के लिए बल्कि पठन-पाठन के लिए भी। स्वाभाविक है कि इसके लिए संघ परिवार के सामने काशी से बेहतर दूसरा स्थान नहीं हो सकता था।

पहले मोदी को काशी से चुनाव लड़ाने का फैसला और अब ये होर्डिंग, संघ परिवार अपने लोगों को बताना चाहता है कि कुछ कारणों से भले ही भाजपा के नेता हिंदुत्व व श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर खुलकर न बोल रहे हों लेकिन उनके भीतर अपने संकल्पों व सरोकारों को लेकर कहीं से भी प्रतिबद्धता कम नहीं है।

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