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जलाशयों, नहरों के पास खाली जमीनों पर लगेंगे सोलर पैनल प्लांट
Tue, 03 Nov 2020 11:26 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 03 Nov 2020 11:26 PM IST
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जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह
- फोटो : amar ujala
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जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि सिंचाई विभाग के बड़े जलाशयों, नहरों व बांधों के आसपास खाली जमीनों पर सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करके बिजली का उत्पादन किया जाएगा। सौर ऊर्जा का उत्पादन पीपीपी मॉडल के आधार पर किया जाएगा।
डॉ. सिंह मंगलवार को सिंचाई विभाग मुख्यालय स्थित सभागार में सौर ऊर्जा उत्पादन के संबंध में प्रस्तुतीकरण के बाद अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग, नेडा एवं ऊर्जा विभाग के अधिकारी आपस में समन्वय कर सिंचाई विभाग के जलाशयों के ऊपर तथा खाली जमीनों पर सौर पैनल स्थापित करने की दिशा में कार्य शुरू कर दें। पानी पर तैरती सौर ऊर्जा के संकल्प को साकार करने के लिए कारगर रणनीति अपनाते हुए 15 दिन के अंदर रिपोर्ट दी जाए। गुजरात की तरह नहरों के किनारे विंड एनर्जी और सोलर पैनल स्थापित किए जाएं, जिससे नहरों की खूबसूरती बढ़े।
बैठक में बताया गया कि निदेशक नेडा भवानी सिंह खंगरौत को ऊर्जा विभाग की ओर से और सिंचाई विभाग की ओर से विशेष सचिव प्रियंका निरंजन व मुख्य अभियंता आईएसओ नवीन कपूर को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
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जलशक्ति मंत्री ने कहा कि करीब 8 महीने पहले सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें सिंचाई विभाग के पास उपलब्ध जमीनों पर सौर पैनल स्थापित कर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर विचार किया गया था। गुजरात और आंध्र प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन के तरीकों से भी मदद ली जा सकती है। सिंचाई विभाग को लिफ्ट कैनाल और ट्यूबवेल आदि के संचालन के लिए ऊर्जा विभाग को भारी मात्रा में राशि चुकानी पड़ती है। सभी नलकूपों व अन्य प्रणालियों में मीटर लगाए जाएं, ताकि उनकी बिलिंग सही हो।
मुख्यमंत्री के सलाहकार केवी राजू ने नरोरा बैराज के पास सिंचाई विभाग की लगभग 1000 एकड़ भूमि का उपयोग करते हुए सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित कराने के संबंध में जापान के निवेशकों के बाबत बात रखी। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अरविंद कुमार ने सौर ऊर्जा उत्पादन में सिंचाई विभाग को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। अपर मुख्य सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन टी वेंकटेश ने कहा कि सोलर ऊर्जा से विभाग के पंप कैनाल व ट्यूबवेलों का संचालन करने से ऊर्जा विभाग को भुगतान की जाने वाली राशि की बचत होगी। सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने भी सुझाव दिए।
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डॉ. सिंह मंगलवार को सिंचाई विभाग मुख्यालय स्थित सभागार में सौर ऊर्जा उत्पादन के संबंध में प्रस्तुतीकरण के बाद अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग, नेडा एवं ऊर्जा विभाग के अधिकारी आपस में समन्वय कर सिंचाई विभाग के जलाशयों के ऊपर तथा खाली जमीनों पर सौर पैनल स्थापित करने की दिशा में कार्य शुरू कर दें। पानी पर तैरती सौर ऊर्जा के संकल्प को साकार करने के लिए कारगर रणनीति अपनाते हुए 15 दिन के अंदर रिपोर्ट दी जाए। गुजरात की तरह नहरों के किनारे विंड एनर्जी और सोलर पैनल स्थापित किए जाएं, जिससे नहरों की खूबसूरती बढ़े।
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बैठक में बताया गया कि निदेशक नेडा भवानी सिंह खंगरौत को ऊर्जा विभाग की ओर से और सिंचाई विभाग की ओर से विशेष सचिव प्रियंका निरंजन व मुख्य अभियंता आईएसओ नवीन कपूर को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
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जलशक्ति मंत्री ने कहा कि करीब 8 महीने पहले सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें सिंचाई विभाग के पास उपलब्ध जमीनों पर सौर पैनल स्थापित कर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर विचार किया गया था। गुजरात और आंध्र प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन के तरीकों से भी मदद ली जा सकती है। सिंचाई विभाग को लिफ्ट कैनाल और ट्यूबवेल आदि के संचालन के लिए ऊर्जा विभाग को भारी मात्रा में राशि चुकानी पड़ती है। सभी नलकूपों व अन्य प्रणालियों में मीटर लगाए जाएं, ताकि उनकी बिलिंग सही हो।
मुख्यमंत्री के सलाहकार केवी राजू ने नरोरा बैराज के पास सिंचाई विभाग की लगभग 1000 एकड़ भूमि का उपयोग करते हुए सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित कराने के संबंध में जापान के निवेशकों के बाबत बात रखी। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अरविंद कुमार ने सौर ऊर्जा उत्पादन में सिंचाई विभाग को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। अपर मुख्य सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन टी वेंकटेश ने कहा कि सोलर ऊर्जा से विभाग के पंप कैनाल व ट्यूबवेलों का संचालन करने से ऊर्जा विभाग को भुगतान की जाने वाली राशि की बचत होगी। सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने भी सुझाव दिए।