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Lucknow News: आज सूर्यग्रहण, पर सूतक मान्य नहीं
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लखनऊ। वर्ष 2026 का पहला सूर्यग्रहण मंगलवार को पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अमावस्या के साथ सूर्यग्रहण का यह दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन तर्पण-श्राद्ध के साथ दान से पुण्य मिलेगा।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि फाल्गुन अमावस्या तिथि पर मंगलवार को सूर्यग्रहण पड़ रहा है। यह शाम 5:26 बजे से शुरू होगा और समापन शाम 7:57 बजे होगा। उन्होंने बताया कि अक्सर सूर्यग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक काल लागू हो जाता है, लेकिन यह सूर्यग्रहण भारत में देखा नहीं जाएगा। इस वजह से इसका सूतक काल भी नहीं लगेगा।
आंशिक सूर्यग्रहण दक्षिणी अमेरिका, अर्जेन्टीना, चिली, दक्षिणी अफ्रीका के क्षेत्रों, दक्षिण अटलांटिक महासागर, दक्षिणी प्रशांत महासागर और अंटार्कटिका में दिखेगा। यह वलयाकार होगा। ग्रहण के दौरान सूर्य आग की चमकती अंगूठी जैसा दिखे। इस ग्रहण को रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है।
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एसएस नागपाल ने बताया कि अमावस्या के साथ सूर्यग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन देवपितृ कार्य, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान व भोजन के साथ वस्त्र या धन का दान करना पुण्य में वृद्धि का कारक माना जाता है।
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ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि फाल्गुन अमावस्या तिथि पर मंगलवार को सूर्यग्रहण पड़ रहा है। यह शाम 5:26 बजे से शुरू होगा और समापन शाम 7:57 बजे होगा। उन्होंने बताया कि अक्सर सूर्यग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक काल लागू हो जाता है, लेकिन यह सूर्यग्रहण भारत में देखा नहीं जाएगा। इस वजह से इसका सूतक काल भी नहीं लगेगा।
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आंशिक सूर्यग्रहण दक्षिणी अमेरिका, अर्जेन्टीना, चिली, दक्षिणी अफ्रीका के क्षेत्रों, दक्षिण अटलांटिक महासागर, दक्षिणी प्रशांत महासागर और अंटार्कटिका में दिखेगा। यह वलयाकार होगा। ग्रहण के दौरान सूर्य आग की चमकती अंगूठी जैसा दिखे। इस ग्रहण को रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है।
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एसएस नागपाल ने बताया कि अमावस्या के साथ सूर्यग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन देवपितृ कार्य, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान व भोजन के साथ वस्त्र या धन का दान करना पुण्य में वृद्धि का कारक माना जाता है।