'सोशल मीडिया की कोई वैल्यू नहीं, यह फालतू लोगों का काम है'
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फिल्मी परिवार में जन्म लेने और फिल्मों को ही कॅरिअर बनाने वाले अभिनेता इमरान खान इसे बस मनोरंजन का जरिया भर मानते हैं।
वे कहते हैं, सामाजिक सरोकारों से फिल्मों का कोई मतलब नहीं। उनकी नजर में सोशल मीडिया की कोई वैल्यू नहीं क्योंकि यह उनका काम है, जो खाली हैं।
हां, लैंगिक समानता के मुद्दे पर वे सामाजिक सोच में बदलाव को जरूरी मानते हैं। उनका कहना है कि इसकी शुरुआत हमें खुद से, अपने परिवार से, दोस्तों और फिर परिवार से करनी होगी।
यूनिसेफ के ब्रांड एंबेसडर अभिनेता इमरान खान ‘स्टैंडिंग अप फॉर जेंडर इक्वलिटी’ अभियान के तहत रविवार को राजधानी में थे। मीडिया से मुखातिब इमरान ने कहा कि फिल्में एंटरटेनमेंट के लिए होती हैं। हम क्यों चाहते हैं कि इन्हें देखकर समाज बदले।
खाली लोगों के लिए हैं ट्विटर-फेसबुक
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया उनके लिए है जो खाली हैं। हर घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं। मेरी समझ में नहीं आता कि पेरिस में या कहीं और कुछ हुआ तो लोग कमेंट करना शुरू कर देते हैं। क्या इससे आतंकी हमला करना छोड़ देंगे या फिर सब कुछ बदल जाएगा।
बेटी को बेहतर माहौल देने की कोशिश
मैं मानता हूं कि समाज का माहौल लड़कियों के पक्ष में कभी नहीं रहा। मैं भी एक बेटी का पिता हूं। यह सच है कि उसकी परवरिश एक आम लोगों से हटकर एक अलग परिवार में हो रही है, जहां सुरक्षा भी है और लालन-पालन के तरीके भी स्पेशल हैं। ऐसे में उसे तो कोई परेशानी नहीं होने दूंगा, पर मेरा फोकस समाज को बेहतर करने पर है, ताकि सभी बेटियों को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सके।
महिलाओं को कमतर आंका जाता है
महिलाओं को कमजोर और कमतर आंकना ही सबसे बड़ी दिक्कत है। शिक्षा-स्वास्थ्य-आर्थिक क्षेत्र में वे कमजोर हैं। उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समाज की सोच में बदलाव जरूरी है।