...तो छिनैती के अपराध में 14 साल की होगी सजा, राज्य विधि आयोग ने सीएम को भेजा प्रस्ताव
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अब महिलाओं और वृद्धों से छिनैती करने पर सख्त सजा के प्रावधान के साथ ही लूटा हुआ माल खरीदने वालों पर भी लूट की धारा में मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान होगा। इस संबंध में राज्य विधि आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव भेजा है।
इसके लिए आयोग ने उत्तर प्रदेश दंड विधि (संशोधन) विधेयक, 2020 का प्रारूप तैयार कर छिनैती को पृथक एवं गंभीर अपराध बनाने की व्यवस्था की है। आयोग ने छिनैती करने पर 14 वर्ष की सजा की सिफारिश की है।
आयोग के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश एएन मित्तल ने सिफारिश में कहा है कि प्रदेश में महिलाओं से चेन, पर्स, मोबाइल व अन्य आभूषण दिन-दहाड़े लूटने की काफी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देकर कहा कि पीड़ितों में महिलाओं की संख्या लगभग 97 प्रतिशत है।
लुटेरे वृद्ध एवं असहाय महिलाओं को निशाना बनाते हैं। इस प्रकार की घटनाओं के संबंध में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 356, 379 तथा 392 के तहत मुकदमे दर्ज होते हैं। धारा 356 आईपीसी के अंतर्गत केवल दो वर्ष की सजा का प्रावधान है और अपराध जमानत योग्य है। जबकि धारा 379 मे तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
हरियाणा में छिनैती के लिए अलग से कानून
आयोग का कहना है कि ऐसे मामलों में गंभीर सजा न होने के कारण अभियुक्तों को आसानी से जमानत मिल जाती है। हरियाणा एवं गुजरात में छिनैती को गंभीर अपराध मानते हुए अलग से कानून बनाया है।
इस प्रकार के अपराध सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय हैं, जबकि यूपी में यह मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारणीय है। राजस्थान सरकार ने भी एक प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास कानून बनाने की अनुमति के लिए भेजा है।