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गैस की खातिर रातों की नींद कुर्बान: 200 लोगों की कतार में आए महज 70 सिलिंडर तो हुआ हंगामा
Wed, 01 Apr 2026 03:54 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
कुलदीप सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
कुलदीप सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 01 Apr 2026 03:54 PM IST
सार
उपभोक्ता रात 12 बजे से ही खाली सिलिंडर लेकर कतारों में डट रहे हैं। रात भर एक मैदान में चटाई बिछाकर और मच्छरदानी लगाकर पहरेदारी करने के बावजूद कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। वहीं, सिलिंडर कम आने पर हंगामा हो रहा है।
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सिलिंडर न मिलने पर हंगामा करने वालों को समझाती पुलिस व सिलिंडर के साथ रखी चटाइयां।
- फोटो : amara ujala
विस्तार
लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार स्थित नाउवा खेड़ा गांव में रसोई गैस के लिए मची त्राहि-त्राहि अब सड़कों पर हंगामे और पुलिसिया दखल तक पहुंच गई है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपभोक्ता रात 12 बजे से ही खाली सिलिंडर लेकर कतारों में डट रहे हैं। रात भर एक मैदान में चटाई बिछाकर और मच्छरदानी लगाकर पहरेदारी करने के बावजूद कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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इन उपभोक्ताओं को बाबा विश्वनाथ गैस एजेंसी (60 फीट रोड) से सिलिंडर की आपूर्ति होती है, मगर मंगलवार को इनका धैर्य उस समय जवाब दे गया, जब 10 घंटे लाइन में लगने के बाद भी एजेंसी की गाड़ी सुबह करीब 10 बजे केवल 70 सिलिंडर लेकर पहुंची, जबकि कतार में 200 से अधिक लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
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आक्रोशित लोगों ने गाड़ी को यह कहकर लौटा दिया कि सिलिंडर बंटेगा तो सबको मिलेगा, वरना किसी को नहीं। मौके पर बढ़ते तनाव को देख सुबह करीब 10:35 बजे पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस की मौजूदगी में कतार में आगे खड़े लोगों को सिलिंडर बांटा गया। बाकी लोग अगले दिन सिलिंडर मिलने की आस में फिर कतार में लग गए।
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इन्होंने बताई परेशानी
दुबग्गा निवासी रामेश्वर प्रसाद तीन दिनों से लाइन में डटे थे। उन्होंने बताया कि घर से मच्छरदानी और पानी की बोतल लाते हैं और मैदान में रात भर सोते हैं। तीन दिन बाद मंगलवार को उनका 18वां नंबर आया, तब उन्हें गैस मिल सकी।
- वहीं, सुल्तान ने बताया कि वह तीन दिन से रात 12 बजे आकर कतार में खड़े हो जाते हैं। इसके बावजूद आज भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
- श्रीपाल ने बताया कि रात 2 बजे से लाइन में लगे थे, लेकिन उनका नंबर 118वां था, जबकि स्टॉक केवल 70 सिलिंडरों का ही आया।
कतार में जगह सुरक्षित रखने के 100 रुपये
जहां आम जनता गैस के लिए सड़कों पर रातें काट रही है, वहीं, इस संकट के बीच कुछ लोग आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। कतार में लगे लोगों ने बताया कि जगह सुरक्षित रखने और सिलिंडरों की रखवाली के लिए उन्हें अपनी जेबें भी हल्की करनी पड़ रही है। कई लोग दूसरों के सिलिंडरों की रातभर रखवाली करने के बदले 100 रुपये तक वसूल रहे हैं। मजबूरी में उपभोक्ता अपनी जगह बचाने के लिए यह रकम देने को तैयार हैं।