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Lucknow News: प्लास्टिक कचरे से बने स्लीपर देंगे रेल ट्रैक को मजबूती

Fri, 29 Nov 2024 02:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Fri, 29 Nov 2024 02:00 AM IST
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Sleepers made from plastic waste will strengthen the railway track
लखनऊ। प्लास्टिक कचरे को फाइबर ग्लास मैटेरियल में बदला जा रहा है, जिससे रेलवे स्लीपर बनाए जा रहे हैं। ये बेहद मजबूत होने के साथ किफायती भी हैं। इससे खर्च घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
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आरडीएसओ स्टेडियम में बृहस्पतिवार से शुरू हुई तीन दिवसीय इनो रेल प्रदर्शनी में शापोरजी पालोंजी कंपनी के स्टॉल पर इन रेलवे स्लीपरों को लगाया गया है। दरअसल, रेलवे स्लीपर पटरियों को जोड़ने का काम करते हैं। अभी रेलवे जिन स्लीपरों को इस्तेमाल करता है, वे कंक्रीट के बनते हैं, जिसमें काफी खर्च आता है। वहीं अब प्लास्टिक कचरे से स्लीपर बनाने का काम किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रदर्शनी में जर्मनी, रूस, ऑस्ट्रिया सहित 175 देशों की कंपनियां शामिल हो रही हैं।
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इनो रेल प्रदर्शनी में ही प्राइम रेल इंफ्रालैब्स कंपनी की ओर से सुपर वेटेड स्लीपर्स का प्रोटोटाइप लगाया गया है। कंपनी के सीनियर मैनेजर सी. अंकित कुमार ने बताया कि यह तीन टन वजनी स्लीपर पटरियों को मजबूती से पकड़ते हैं। इनकी लंबाई व चौड़ाई सामान्य स्लीपरों से अधिक होती है। भारतीय रेलवे में इन्हें इस्तेमाल के बाबत बातचीत हो रही है।
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चार घंटे में डिरेल ट्रेन को पटरी पर रख देगी मशीन
बेकेलाइट इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (बीईएमसीओ) की ओर से इनो रेल प्रदर्शनी में ऐसी हाइड्रोलिक रिरोलिंग मशीन लगाई गई है, जो ट्रेन के डिरेल होने पर बोगियों को कम समय में पटरी पर रख देगी। कंपनी के अधिकारी संदीप ने बताया कि महज चार घंटे में यह मशीन पूरी ट्रेन को पटरी पर रख देती है। भारतीय रेलवे में 350 सेट मशीन इस्तेमाल की जा रही हैं।

ट्रैक की निगरानी करेगा रेल मित्र

ट्रैक की निगरानी के लिए रेल मित्र डिवाइस प्रदर्शनी में लगाई गई। प्रीमियर सील्स कंपनी ने यह डिवाइस तैयार की है। प्रतिनिधि किरण पथरावत ने बताया कि अभी ट्रैक की निगरानी मैनुअली की जाती है। यह डिवाइस पूरे ट्रैक की सर्विलांस करती है। इसमें सीसीटीवी, सेंसर्स लगे हैं, जो गड़बड़ी होने पर तत्काल आला अफसरों को सूचना देते हैं। इससे ट्रैक की सुरक्षा पुख्ता होती है।

नवाचार को मिलता है मंच

सीआईआई ट्रेड फेयर काउंसिल के अध्यक्ष बी. थियागराजन ने कहा कि इनो रेल से नवाचार को मंच मिलता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य आधुनिकीकरण, दक्षता और स्थिरता की दिशा में भारतीय रेलवे की यात्रा का समर्थन करना है। प्रदर्शनी रेलवे की व्यापक आकांक्षाओं को दर्शाता है। एआई, आईओटी और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण जैसी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत की धारणा को बल देता है।


कार्बन उत्सर्जन करना है कम
इनोरेल प्रदर्शनी के अध्यक्ष मंगल देव ने कहा कि जलवायु प्रतिबद्धताओं के तहत कार्बन उत्सर्जन को 33% तक कम करना है। इसमें रेलवे अहम भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2030 तक माल ढुलाई हिस्सेदारी को 36% से बढ़ाकर 45% करना, दक्षता में सुधार और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए फ्रेट कॉरिडोर स्थापित किए गए हैं। अवध रेल इंफ्रा लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अभिषेक सराफ ने कहाकि अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और रेलवे इसमें भूमिका निभा रही है।
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